हिमांशु राजा

बैंगलोर |

“पिकनिक”

पिताजी टेलीफोन विभाग में कर्मचारी थे। तनख्वाह ज्यादा नही थी, मगर अपने दोनो बेटो को राजा की तरह रखते। अच्छे कॉन्वेंट विद्यालय में दोनो बच्चो को भर्ती किया था। उस साल छोटा चौथी में गया और बड़ा छठी कक्षा में।

सर्दी का मौसम चालू हो गया था। एक दिन विद्यालय से घर आकर भोजन करते समय दोनो बच्चो ने बड़ी ही खुशी से मा बाउजी से कहा, हमारी शाला से तीन दिन बाद पिकनिक में जाने की योजना बनी है। हमारे टीचर ने हमे 300 रुपये लाने को कहा है दोनो के लिए, अगर पिकनिक में जाना हो तो। बड़े और छोटे दोनो ने कहा हमे जाना है अम्मा बाउजी। बाउजी ने कहा अच्छा ठीक है पहले दोनो खाना तो खा लो, मैं तुम दोनो को कल सुबह पैसे देता हुं, और सभी मुस्कुराकर खाने लगे। अम्मा ने बड़ी ही बेचैन सी नज़रो से बाउजी की ओर देखा, बाउजी जी ने अपनी आंखें झपकाकर तसल्ली रखने को कहा।

शाम को दोनो बच्चे खेलने चले गये। माँ बाउजी से कहने लगी महीने के अंत में 300 रुपये कहां से लाएंगे। इस महीने खर्चा भी थोड़ा ज्यादा हो गया है। आपकी चप्पल भी टूट गयी है, नयी चप्पल 150 से कम में ना आयेगी। बाऊजी ने कहा अरी भागवान चिंता क्यों करती हो, इस महीने चप्पल नही लेते, किसी तरह काम चला लेंगे। ये कहकर बाऊजी मुस्कुराये और दोनो चाय की चुस्कियां लेने लगे। बड़ा बेटा किसी कारणवश घर जल्दी आ गया था और ये सारी बातें दरवाजे के पीछे छुपकर सुन रहा था। उसकी आंखों में आंसू आ गये की अम्मा बाउजी हमारे सुख सुविधाओं के लिए कितना त्याग करते हैं।

अगले दिन सुबह बाऊजी ने 300 रुपये बड़े के हाथ में दिये और कहा सर को दे देना और खूब आनंद करना पिकनिक में। बड़े ने 150 रुपये वापस करते हुए कहा, अरे बाऊजी पिकनिक में छोटे को जाने दो, मुझे परीक्षा की तैयारी करनी है, मैं अगले साल चला जाऊंगा। कही ना कही बाउजी ने बड़े बेटे की आंखों को पढ़ लिया और मंद ही मंद मुस्कुराने लगे की आज मेरा बड़ा वाकई में बड़ा हो गया हैं।

दोनो बच्चे विद्यालय चले गये। बाउजी ने मा से कहा अगले साल पेहले से ही दोनो बच्चो की पिकनिक के पैसे जमा करके रखेंगे नही तो बड़ा फिर से कोई बहाना बना लेगा। —-३१ जुलाई २०१९ |

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