शिव प्रताप सिंह “सूर्य”

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जीवन परिचय: वरिष्ठ साहित्यकार शिव प्रताप सिंह “सूर्य” जी उत्तरप्रदेश के फतेहपुर से हैं| अनेक उपलब्धियों के साथ-साथ हिंदी साहित्य सेवा डॉट कॉम द्वारा आयोजित हिंदी दिवस प्रतियोगिता – २०२० में इनकी रचना को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ और इन्हे पुरस्कार स्वरूप ११०० रुपये और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया|

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तथागत की करुणा (गीत)

तथागत करुणा के अवतार।
चाह रहे थे अपकारी का भी करना उपकार,
इसी से मिला विश्व का प्यार।। तथागत ………।१
वर्षागम की शिखर दुपहरी
शीतलता तरुदल-तल ठहरी
दिखी सघन सफला अमराई
करते बुद्ध विचार। तथागत…………..।२
झड़े पके फल नीचे बिखरे
प्रारब्ध ही हैं भूले बिसरे
लगी भूख भी है जोरों की
लेते धूप निवार।तथागत…………।३
लेटे खाकर आम्र-छांह में
डूब गए चिंतन अथाह में
तभी वहां कुछ युवजन आये
तरु पर करें प्रहार।तथागत…….….….।४
कुछ फल खाए लोभ बढ़ चला
झोड़ रहे थे चूकते कला
अश्म पड़ा गौतम के माथे
बही रुधिर की धार।तथागत.……..…….।५
युवा डरे अपराध बोध से
क्षमा मांगते उन अक्रोध से
बहे बुद्ध के दृग से आंसू
उनकी दशा निहार।तथागत….………।६
बोले हम से पाप हो गया
नाथ!लोभ में ज्ञान खो गया
अति अनर्थ जो संत रुलाये
बोले बुद्ब सप्यार।तथागत ……………।७
पत्थर लगा रसाल विटप को
उसने दिया मधुर फल तुमको
दे न सका मैं कुछ भी वैसा
रहा सहा मन मार।तथागत…….….…।८
पर हित-रत ये विटप धन्य हैं
अश्रु इसी अनुताप जन्य हैं
भय,अपराध-बोध ही मैंने
दिया,दिया कब प्यार?।तथागत………………।९