विक्की कुमार आनंद

चम्पारण बिहार |

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“अख़बार”

अख़बार पढ़ते पढते उम्र गुजर गई
बलात्कारियों का खौफ रुका नहीं
यहां लोग नारा लगा रहे हैं
बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का।—————१९ अगस्त २०१९ |

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देश के सीमा पर तैनात
मां भारती के वीर सपूतों को सलाम।——–
कहाँ किसी में दम जो इस झंडे को झुका दे।
हमसे लड़ने की कोशिश किया तो
दुश्मन को दुनिया के नक्शे से मिटा दे।
दम हैं तो सामने आओ छुप छुप कर
वार करने से क्या मजा
आओ तुम्हें इस गोली के मज़े चखा से।

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कविता

ये भारत देश है हमारा, यहां देखने को मिलता है,एकता का नज़ारा।
ये भारत देश है हमारा , हिन्दू मुस्लीम शेख इसाई में है भाईचारा ,ये भारत देश है हमारा।
कहा किसी से कम हम, कहां किसी के पीछे ।
ये भारत देश है हमारा ,यहां देखने को मिलता है, एकता का नज़ारा ।
ये भारत देश है हमारा, भगत सिंह आजादी के लिए ,अपना सर फांसी पर चढ़ाया।
बापू ने इस देश को आजाद कराया ।ये भारत देश है हमारा ,यहां देखने को मिलता है एकता का नज़ारा।

कविता

जिन्दगी का सफर दोस्तो, मैंने बहुत लंबा किया,
कुछ लोगों ने साथ दिए, तो कुछ लोगों ने पैर खींचने का काम किया,
अपने हिम्मत के सहारे, मै आगे बढ़ता गया,
और जलने वाला मुझसे जलता गया,
और मैं अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता गया। …………………………… १८ जुलाई २०१९ |

One thought on “विक्की कुमार आनंद

  1. जी बहुत बहुत धन्यवाद मेरा कहानी अपने साइट पर प्रकाशित करने के लिए

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