राघव रामेश्वर

मैनपुरी, उत्तर प्रदेश |

-कोई यूॅं ही किसी में बंधता गया-

समय यूं गुजरता चला ही गया,
कोई यूॅं ही किसी में बंधता गया,
न उसको खबर थी, न उसको पता था,
कहॉं जा रहा था, वो खुद लापता था |
जब होश आया तो, खुद को न पाया,
यॅू ही किसी में सिमटता गया,
वो पहचान अपनी खोता गया,
समय यूॅं गुजरता चला ही गया,
कोई यूॅं ही किसी का होता गया |
वो था मस्त मौला, न उसको खबर थी,
जहॉं जा रहा था, वो दुनिया अलग थी,
न उसका वो घर था,न वो उसका मकॉं था,
वो फिर भी अपनी जिद पर यूॅं ही अडा था,
वो प्यारे से बागो को उजाडता गया,
समय की तन्हाई में, वो बिछडता गया,
वो अपनी पहचान खोता गया,
समय यूॅं गुजरता चला ही गया,
कोई यूॅं ही किसी में बंधता गया | …………….. १९ जुलाई २०१९ |

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