रचनाकार हिमांशु सुरगड़े

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जीवन परिचय: रचनाकार हिमांशु सुरगड़े आय आय टी खड़गपुर (डिपार्टमेंट ऑफ़ मैथमेटिक्स इंटीग्रेटेड एम एस सी मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग ) में पढाई कर रहे हैं | इन्हे संगीत, और क्रिकेट का शौक है |

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गुरु को समर्पित

सादर प्रणाम🙏
मैं, एक तुच्छ प्राणी, जिन महामानवो का वर्णन करने जा रहा हूँ , उनके बारे में कुछ भी बोलने के योग्य मैं खुद को नही समझता। फिर भी दिल से कुछ चंद वाक्य लिखने का प्रयास किया है। यदि जाने-अनजाने में कोई भूल हो गयी हो तो कृपया नादान समझ क्षमा प्रदान करें।🙏🙏
जिस प्रकार सागर की गहराई नापी नहीं जा सकती उसी प्रकार ‘गुरु’ इस सामान्य प्रतीत होने वाले शब्द की गहराई बयाँ नहीं की जा सकती।
इस व्यक्ति के तेज से जीवन के घने जंगलों में भी रास्ते नज़र आने लगते हैं। इसीलिए उन्हें मार्गदर्शक कहा जाता है।
परंतु काँटो से भरे जीवनपथ पर शिक्षा तथा संस्कार रूपी फूल बिछाकर उसे चलने लायक बनाते हैं तो वो भी गुरु ही!
कहने का तात्पर्य ये है की नदी पार करते समय माँझी अगर गुरु है तो उस नाव को गुरुकृपा है।
फिर भी इन महामानवों की विनम्रता सारा श्रेय विद्यार्थियों को देतीे है।
इतना ही नहीं, वे अपने शिष्यों को ‘एकलव्य’ के भाँती स्वतंत्र होने के लिए प्रेरित करते हैं ताकि उन्हें कभी गुरु की कमी महसूस न हो।
सभी गुरुजनों को मेरा नमन!🙏

गोविंद से बढ़कर हैं जो,
जिनके अद्भुत स्पर्श से,
आकार मिले हर कोमल मन को,
उनका तुम सम्मान करना,
अपने गुरु का मान रखना…

युगों-युगों से साथ हमारे,
जीवन पथ पर हमें सँभाले,
मार्गदर्शक के रूप में,
उनका स्वप्न पूर्ण करना,
अपने गुरु का मान रखना…

विद्या रूपी है वरदान,
प्रत्येक शिष्य बने,
सूर्य के भाँति दैदिप्यमान,
इसका सदैव ध्यान रखना,
उस गुरु का सम्मान करना…

आपन तेज औरन को दे,
यद्यपि तेज ना खोए,
जल से गहरी जिनकी निष्ठा,
तुम भी आत्मसमर्पण करना,
अपने गुरु का मान रखना…

चंद्रगुप्त को चाणक्यनीति,
समर्थ करे वो छत्रपती,
तिनकों में भी खोजे हीरा,
सदैव उनके ऋणि रहना,
अपने गुरु का मान रखना…

प्रत्येक गुरु की इतनी इच्छा,
शिष्य बने उनसे भी अच्छा,
चाहे ना दो गुरुदक्षिणा,
केवल आदर्श बनाए रखना,
अपने गुरु का सम्मान करना!

One thought on “रचनाकार हिमांशु सुरगड़े

  1. हिमांशु
    आप जैसे शिष्य हों तो गुरु भी आदरणीय हो जाते हैं। किसी का आभार मानना मानवता का सर्वोत्तम गुण है। धन्यवाद

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