रचनाकार रेखा पारंगी

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जीवन परिचय: रचनाकार रेखा पारंगी एक अध्यापिका हैं और जंवाई बांध पाली राजस्थान की रहने वाली हैं |

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मेरे दर्द

मेरे दर्द का नहीं है मरहम,
कम न लगता हर किसी को अपना दर्द
जीने की चाहत नहीं होती,जब बढ़ जाता दर्द,
गुज़रे जब खुद पर तो जाने अपना दर्द,
मेरे दर्द का कोई नहीं आराम।
जीने की रस्म,मरने का मंजर दिखाता मेरा दर्द,
कभी हार तो कभी निराशा,
हर दौर में तड़प उठते मेरे दर्द।
सुनाए किसे अपनी दास्तां,
दुनिया को नहीं हमसे कोई वास्ता,
हर तरफ बेरूखी का साया,
घेरे हैं हमको दर्द की माया।
बढ़ता जाते जख्म दिल के,
आंखों से अश्क बहते मन के,
फिर भी कम न होते मेरे दर्द।

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प्यार के गीत

दिल के कोरे कागज पर कोई,
गीत नया सा लिखूं कोई।
लिखूं तुमको,या अपनी जिंदगानी लिखूं,
लिखा है तुमको गीतों, ग़ज़लों में,
ज़र्रा ज़र्रा गाया है,
हर शब्द लिपटे है हमसे , फिर कागज पर उतर आया है है।
तुमको अपना इश्क लिखूं,या अपनी जिंदगानी लिखूं?
बादल, बारिश, नदियां,झील , समंदर,
सबसे तेरा श्रृंगार लिखूं।
धड़कनों के पन्नों पर सजाकर ,
तुमको जीवन लिखूं।
जन्म जन्म की डोर लिखूं,
या खुद को हर जन्म डोर से बंधकर लिखूं?
इस पागल मन की प्रीत लिखूं या फिर अपनी जिंदगानी लिखूं?
पर पर हारा तुमको,जीत लिखूं या अपनी जिंदगानी लिखूं?