रचनाकार रितेश कुमार

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जीवन परिचय: रितेश कुमार उत्तरप्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले हैं | इनका जन्म ०५ जून १९९५ को हुआ | पाँचवी कक्षा तक की पढ़ाई गांव में की उसके बाद नाना के घर आठवीं तक, और फिर कानपुर चले गए जहाँ बारहवीं तक की पढ़ाई करने के बाद लखनऊ चले गए | लखनऊ से मेकैनिकल इंजिनीरिंग में स्नातक किया। कवितायें लिखने का शौक है , जब भी दुखी होते है तो कविताओं का सहारा लेते है। अपने आप को प्रोत्साहित करने के लिएये कई विषयों पर कविता लिखता हैं, हास्य कविताएं भी लिखते हैं |

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 “क्योंकि हम कुंआरे है”

मंज़िले दूर है फिर भी ,
हौसले बुलंद हमारे है
क्योंकि हम कुंआरे है।

घूमते फिरते है अपनी ही मस्ती में ,
न कोई दरिया न कोई किनारे हैं,
क्योंकि हम कुंआरे है।

बेपनाह जी रहे है जिंदगी अपनी,
न किसी के प्यार न किसी के इशारे हैं,
क्योंकि हम कुंआरे है।

बन गए इंजीनियर, अब बेरोजगार है
न कोई कमाई है ना कोई पगारें हैं
क्योंकि हम कुंआरे हैं।

अब कोई नही पूछता हाल मेरा,
न किसी के सोना बाबू, न किसी के यारे हैं
क्योंकि हम कुंआरे हैं ।। ——— ०३ अगस्त २०१९ |

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