रचनाकार राजेश आंचलिया

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जीवन परिचय: रचनाकार राजेश आंचलिया जी मध्यप्रदेश इंदौर के रहने वाले हैं| पेशे से यह एक केमिकल व्यापारी हैं, इन्होने विधुत इंजीनियरिंग में स्नातक किया है |

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जैसा कि वर्तमान मे कोरोना महामारी का यह भयावह दौर
इस कठिन समय मे हमारे देश के चिकित्सक गण. पुलिस कर्मी, सिविल वर्कर इत्यादि जो अपनी जान जोखिम मे डाल कर अविरत मैदान मे डटे हुए हैं
इसमे से कुछ वीर जाबांजो ने इस देश के स्वास्थय और आरोग्य की खातिर अपने प्राणो तक की आहुति दे दी
मैरी 2 छंदो की यह स्वरचित रचना ऐसे ही सपूतो को समर्पित

पहला छंद-

परमार्थ से प्रीत लगाते , कर्तव्यो की रीत निभाते
राजधर्म के गौरव पटल पर पुरुषार्थ जिनका महकता है |

नवसृजन के वाहक बनते , संक्रमण का तिमिर हरते
बलिदानों के नभ मंडल पर ललाट जिनका चमकता है |

अपनी धरा का धर्म निभाते , फना हो कर फर्ज निभाते
ज्योति जिंदा रखने खातिर पंतगा जल कर मरता है |

मानवता का मान बढ़ाते , स्वस्थ भारत का अभिमान बढ़ाते,
कर्तज्ञ राष्ट्र सम्मान अपना उन पर न्योछावर करता है

दुसरा छंद

प्रहरी बन कर बैठे हो तुम धावो वाली छाती से,
अंधेरो को रोशन करते सदभावो की बाती से |

भूल चुके तुम ख्वाब खुद के, हम वतन के नातो से
अपने चमन को चिरंजिवी बनाते , पराक्रमी जज्बातो से ,

खुद को मिटाकर, वीर जो देश को सजाता है,
नतमस्तक ये हिन्द , तुम्हारे शौर्य के गीत गाता है

छोड़ परिवार रण मे खड़ा वो, मातृभूमि पर मरता है
कर्तज्ञ राष्ट्र सम्मान अपना , उन पर न्यौछावर करता है