रचनाकार बन्दना पाण्डेय

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जीवन परिचय: बन्दना पाण्डेय जी बिहार प्रदेश के पटना शहर की रहने वाली हैं | इन्होने गंगादेवी महिला महाविद्यालय से बी.एस.सी किया है | ये एक ग्रहणी हैं और लिखना इन्हे बेहद पसंद है | विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में इनकी रचनाएँ छप चुकी हैं |

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ऐ जिन्दगी

ऐ जिन्दगी …..
कभी शहद शहद, कभी नीम तू
कभी कङी धूप, कभी नर्म छाँव तू
कभी ओस की बूँद ,कभी अथाह सागर है तू
कभी ठहरी हुई झील, कभी उफनती हुई नदी है तू
कभी दर्द में सिमट हुई, कभी बंद पलकों की नमी है तू
कभी लफ्ज लफ्ज खामोश, कभी शब्द शब्द बिखर रही
कभी ख्वाब का क्षितिज ,कभी हकीकत का अर्श तू
कभी आसमां सा विस्तृत, कभी गलियों सा संकीर्ण तू
कभी आजाद है ,कभी कैद है, अपने जज्बातो में तू
समय के साथ मिलकर, कितने रंग रूप दिखाती है तू
कभी सुहानी सुबह, कभी बोझिल शाम तू
उम्र के ढलते सफर में, कितने पाठ पढाती है तू
कभी सखी सी लगती, कभी गुरु बन जाती है तू
आ मेरे पास आ …..
तुझे लगा लूँ गले
ऐ जिन्दगी तुम जैसी भी हो
हो बहुत प्यारी मुझे …..😘😘
Love you Jindgi..💝😘

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काश

काश ये वक्त तुम इतने निष्ठुर न होते
कभी तो हमारी मर्जी से चलते
सुख के पल तुम जरा ठहरते
मेरे आंगन मे डेरा डालते
मेरे संग तुम भी खुश होते ..😊

दुख मे धीमे पांव तुम आते
दुख को लेकर जल्दी तुम जाते
गम का अश्रु नयन में न भरते
मेरे ड्योढ़ी के अंदर न आते ..😍

अपनों के दिए हुए जख्मो को
वक्त तुम जल्दी भर देते
टीस, कशक उफनते भावों पर
वक्त तुम मरहम रख देते …💞

उलझनों में तुम न उलझाते
अधीर मन को ढाढ़स बंधाते
अगर हो जाऊँ विचलित कर्म पथ से
तुम मुझे सही राह दिखाते …💝

ये वक्त तेरी अपनी गति है
तेरी अपनी मन मर्जी है
कभी नहीं रूकते कभी न थमते
यही तेरी न्यारी रिति है ..⚘

राजा हो या रंक कोई हो
बलवान हो या कोई दुर्बल हो
तेरे नजर में कोई भेद नहीं है
सब पर तेरी एक नजर है |

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जिन्दगी 

ये मेरी जिन्दगी…💞
तुझे कितने रूपों में देखी
फूलों की तरह खिलते देखी
टूट कर बिखर जाने पर
फिजा में खुशबू लुटाते देखी

ये मेरी जिन्दगी ….💞
तुझे कितने रूपों में देखी
शब्दों के वाणो से
तुम को घायल होते देखी
दिल के अंदर हर जख्मो को
सीलते और मरहम रखते देखी

ये मेरी जिन्दगी …💞
तुझे कितने रूपों में देखी
कर्त्तव्यों के खातिर
लोहे जैसा तपते और पिघते देखी
समय का चोट खाकर
कई रूपों में ढलते देखी

ये मेरी जिन्दगी ….💞
तुझे कितने रूपों में देखी
ठोकर खाकर सोने जैसा
कई वार निखरते देखी
कोयले के खानों में रह कर
अपना मूल्य बचाते देखी

ये मेरी जिन्दगी ….💞
तुझे कितने रूपों में देखी
कभी दुख मे कराह भरी तो
कभी वेदनाओं से चीखी
अन्तर्मन में हर तकलीफो को
दफनाते देखी
टूट टूट कर जुङते देखी
गिर गिर कर सम्भलते देखी
ये मेरी जिन्दगी …💞
तुझे कितने रूपों में देखी

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द्वन्द

सुनो….!!
जब मन की डोर उलझ जाए
जब राह नहीं कोई मिल पाए
जब अन्तर्मन में द्वन्द चले
जब दर्द की सीमा बढ जाए
जब कई सवाल खड़े होकर
तुम को निरुत्तर कर जाए
जब समय चुभाए शूल कोई
लहूलुहान तुम्हें कर जाए
जब टूटे सपने व्यंग्य करें
कोई भी न हो पास तेरे
मरहम न हो कोई तेरे जख्मों का
तब…..!!!
खुद ही जुगनू तुम बन जाना
हिम्मत खुद को ही दे देना
समझा लेना खुद को
पाना और खोना जीवन है
आना और जाना रित है इसकी
गीतासार तुम पढ लेना
खुद को अडिग तुम कर लेना
दुख भरी इस दुनियाँ में
खुद को थोड़ा तसल्ली दे लेना
हाँ….!!!
मानती हूँ कहना और समझाना
आसान है बहुत पर
झेलना बहुत ही मुश्किल है
फिर भी….!!!
जो नहीं है खुद की हांथों में
समझो वो रब की मर्जी है
जब सुख नहीं टिकता दो पल
फिर दुख की क्या विशाद यहां
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 —— ११ अक्टूबर २०१९

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