रचनाकार इंदु बारैठ

हिंदी साहित्य सेवा डॉट कॉम
हिंदी साहित्य सेवा मंच – सेवा हिंदी साहित्य की
www.hindisahityaseva.com

जीवन परिचय:

हाल निवास-लंदन
हिन्दी और संस्कृत अनुवादिका
हिन्दी और संस्कृत शिक्षिका
एन.एच.एस.में गवर्नर
संस्कृत भारती कार्यकत्री

———————————————————-

कविता

योग के होते हैं आठ अंग,
रखना है इनको अब अपने संग।
यम,नियम,आसन, प्राणायाम,
प्रतिदिन करने हैं ये व्यायाम ।
प्रत्याहार,धारणा, ध्यान और समाधि,
कर लो ये सब तो नहीं होगी कैसी भी व्याधि ।
मिटा कर सारे मन के द्वंद,
करता आत्मा को शुद्ध योग है।
इन्द्रियों पर भी विजय दिलवाता योग है।
योगसूत्र से पतंजलि ने करायी योग की पहचान है।
श्री कृष्णा ने भी योग: कर्मसु कौशलम् का दिया गीता में ज्ञान है
मन स्वच्छ,तन भी करता स्वस्थ योग है।
कभी नहीं आते निकट कोई रोग है।
इसको अपनाने का करना सबको संकल्प है।
स्वस्थ रहने का दिखता मात्र यही विकल्प है।
बन जाना अब बस आयुर्वेद और योगायुक्त है।
तभी रह सकेंगे सब रोगों से मुक्त है।