रचनाकार आनंद विजयवर्गीय

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जीवन परिचय: वरिष्ठ रचनाकार आनंद विजयवर्गीय मध्यप्रदेश के इंदौर के रहने वाले हैं|

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● विरहन की वेदना ●

नभ मे श्यामल मेघा छाये
पर्वत पार सूरज छुपता जाये
छम छम सावन जल बरसाये
हृदय मे मीठी पीर जगाये
मन अकुलाऐ….
मीत मेरे तुम न आये ।
खोल किवड़िया बाट निहारु
अकारण आँगन बुहारु
मन ही मन तुम्हे पुकारु
बटौही कोई नजर न आये
नेनौ ने थम थम नीर बहायें
मीत मेरे तुम न आये ।
दिन बीते
रुत बीती
अमराई मे अमियाँ बौरायैं
बगियन मे कलिया खिल जाये ….
खेतौ मे सरसौ लहराये
वसुधा पर हरियाली छायै
ताल की पार पर पनिहारिन
सावनी गाये ….
मीत मेरे तुम न आये ।
वन मे मयूर नृत्य रचाये
ढलते अश्रु मोरनी पी जाये
चरनौई मे ग्वाला कोई
विरह गीत सुनाये
कौयल की कुकू अगन लगाये ….
मीत मेरे तुम न आये ।
थाम गूँजी ढोलक की
कानौ मे मंगल गीत सुनाये
सखियो ने श्रंगार किया
गौरी के साजन लेने आये
प्यास मेरे मन की अभीप्सा
न बन कर रह जाये….
मीत मेरे तुम क्यौ न आये । ————- ०३ अगस्त २०१९ |

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