रचनाकार अशोक मिश्र

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जीवन परिचय: रचनाकार अशोक मिश्र जी उत्तरप्रदेश के जौनपुर जिले के प्रतापगंज क्षेत्र के रहने वाले हैं|

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“कली खिलती नहीं – कविता”

आँख सेअब ख्वाब कोशों दूर
पैर ने पायल दिये है बेंच,
जिंदगी का भार ढ़ोने के लिए,
सह गये वे साहुकारी पेंच।
खेत गिरवीं, खुशी रेहन रख दिये माँ ने,
जवानी घर में बुढ़ा कर सुन रही ताने,
बाप डर बाजार से अब हो गया गुमसुम,
डोलियाँँघर से उठेंगी, राम ही जाने।
दिन हसीं था,रात किस्सा, समय शहनाई,
सुवह वंदन,शाम चंदन, गजल तनहाई,
क्या हुआ,किसने लगाये खुशी पर पहरे,
तीर तो दिखते नहीं, पर घाव हैं गहरे।
अब कली खिलती नहीं, क्या कह गया मौसम,
एक अजन्मा से डरे हैं, कुटिल कातिल हम,
नालियों में बह गया वह प्यार का एक पल,
जनक कुछ निष्ठुर हुआ और माँ हुई निर्जल।
क्यों बना है भार अपना,स्नेह, कोमल प्यार,
क्यों हुआ हुआ है प्रणय-बंधन लाभ का व्यापार,
पिता की ये झुर्रियां हैं बेटियों के वर्ष,
पस्त हिम्मत देखकर बाजार का उत्कर्ष। ———– ०१ अगस्त २०१९ |

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