मुहावरे

जब हम किसी वाक्यांश का सामान्य अर्थ न लेकर किसी विशेष अर्थ में उसका प्रयोग करते हैं, तब हम उसे मुहावरा कहते हैं |  विशेष अर्थ को प्रकट करने वाले वाक्यांश को मुहावरा कहा जाता हैं। उदाहरण के लिए -आँखें फेर लेना  (किसी से बात न करना उसकी उपेक्षा करना); आस्तीन का साँप (मित्र के रूप में शत्रु -कपटी मित्र); अंधे की लाठी (किसी कमज़ोर का सहारा) |   मुहावरा पूर्ण वाक्य नहीं होता, इसीलिए इसका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं करते |’मुहावरा’ अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है बातचीत करना या उत्तर देना। कई बार यह व्यंग्यात्मक भी होते हैं। मुहावरे भाषा को सुदृढ़, गतिशील और रुचिकर बनाते हैं। मुहावरों के प्रयोग से भाषा में अद्भुत चित्रमयता आती है। बहुत अधिक प्रचलित और लोगों के मुँह चढ़े वाक्य लोकोक्ति के तौर पर जाने जाते हैं। इन वाक्यों में जनता के अनुभव का निचोड़ या सार होता है। मुहावरे भाषा की नींव के पत्थर हैं और उस पर उसका भव्य भवन टिका होता है और मुहावरे ही उसकी टूट-फूट को ठीक करते हुए गर्मी, सर्दी और बरसात के प्रकोप से उसकी रक्षा करते हैं। बिन मुहावरों के भाषा निस्तेज, नीरस और निष्प्राण लगती है।

अभिधा, लक्षणा और व्यंजना, ये तीन शक्तियां शब्दों में निहित होती हैं |

(१) अभिधा – जब किसी शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग होता है तब वहाँ उसकी शक्ति अभिधा होती है, जैसे ‘सिर पर चढ़ाना / रखना’ का अर्थ किसी चीज को उठाकर सिर पर रखना होगा।

(२) लक्षणा – जब शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग न करते हुए किसी विशेष प्रयोजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है, यह जिस शक्ति के द्वारा होता है उसे लक्षणा कहते हैं। लक्षणा से ‘सिर पर चढ़ने’ का अर्थ आदर देना होगा। उदाहरण के लिए ‘अँगारों पर लोटना’, ‘आँख मारना’, ‘आँखों में रात काटना’, ‘आग से खेलना’, ‘खून चूसना’, ‘ठहाका लगाना’, ‘शेर बनना’ आदि में लक्षणा शक्ति का प्रयोग हुआ है, इसीलिए वे मुहावरे हैं।

(३) व्यंजना – जब अभिधा और लक्षणा अपना काम खत्मकर लेती हैं, तब जिस शक्ति से शब्द-समूहों या वाक्यों के किसी अर्थ की सूचना मिलती है उसे ‘व्यंजना’ कहते हैं। व्यंजना से निकले अधिकांश अर्थों को व्यंग्यार्थ कहते हैं। ‘सिर पर चढ़ाना’ मुहावरे का व्यंग्यार्थ न तो ‘सिर’ पर निर्भर करता है न ‘चढ़ाने’ पर वरन् पूरे मुहावरे का अर्थ होता है उच्छृंखल, अनुशासनहीन अथवा ढीठ बनाना।

मुहावरे के शब्द – मुहावरे हमारे अनुभवों पर आधारित होते हैं, उनमें इस्तेमाल शब्दों की जगह दूसरे शब्दों का प्रयोग किया जाए तो उनका अर्थ ही बदल जाता है जैसे- ‘पानी-पानी होना’ की जगह ‘जल-जल होना’ नहीं कहा जा सकता। ऐसे ही ‘गधे को बाप बनाना’ की जगह पर ‘बैल को बाप बनाना’ और ‘मटरगश्ती करना’ की जगह पर ‘गेहूँगश्ती’ या ‘चनागश्ती’ नहीं कहा जा सकता है।

|अ ,आ, इ , ई, उ , ऊ, ए , ऐ से शुरू होने वाले मुहावरे|

> अक्ल का अंधा : मूर्ख, बेवकूफ – तुम्हे यह भी समझ नहीं आ रहा क्या कि तुम अक्ल के अंधे हो |

> अक्ल का घास चरने जाना :
समय पर बुद्धि का काम न करना – तुम्हारी अक्ल घास चरने चली गयी है क्या, नल को खुला छोड़ रखा है | 

> अक्ल ठिकाने लगना : सबक
सिखाना – गुस्से में – कभी मेरे
घर आओगे तो तुम्हारी अक्ल ठिकाने लगा दूंगा |

> अक्ल ठिकाने लगना : होश
ठीक होना
–  मुझे न जाने क्या हो गया था, अब जाकर मेरी अक्ल ठिकाने लगी है | 

> अपनी खिचड़ी अलग पकाना :
सबसे अलग रहकर कुछ करना –  ये लोग हमसे बात नहीं
करते, ये अपनी खिचड़ी अलग पकाते हैं | 

> आग-बबूला होना : गुस्सा
होना – छात्र को नकल करते देखकर
अध्यापक आग बबूला हो गए।

> आना – कानी करना : न
करने के लिए बहाना करना – जब मैंने उससे पेंसिल माँगा तो वह आना-कानी करने लगा।

> आँख लगना : सो जाना – टीवी देखते समय मेरी आँख
लग गयी |

> आँख का तारा होना /
आँखों का तारा होना: बहुत प्रिय होना – मेरा बेटा मेरी आँखों का तारा है |

> अंक देना : आलिंगन करना – प्रेम से वशीभूत हो वह
बहुत समय तक अंक दिए रहा।

> अंग – अंग ढीले होना :
थका होना
– सभी
कारीगरों के अंग-अंग ढीले हो चुके होते हैं।

> अंग – अंग मुस्काना :
रोम रोम से प्रसन्नता छलकना – मैच जीतने पर मेरे अंग – अंग मुस्काने लगे।

> अंग धरना : पहनना/धारण
करना – विभिन्न ऋतुओं के अनुसार
हमें वस्त्र अंग धरने चाहिए।

> अंग टूटना : शरीर में
दर्द होना – न
जाने क्यों आज मेरा अंग टूट रहा है।

> अंग लगना : हजम हो
जाना/काम में आना – पौस्टिक
भोजन ही अंग लगता है |

> अंग लगाना : लिपटना /
गले लगाना –  बहुत दिनों के बाद मिले भाई को
मैंने अंग लगा लिया।

> अंग से अंग चुराना :
संकुचित होना – रेलवे
स्टेशन में इतनी भीड़ होती है कि चलते समय अंग से अंग चुराने पड़ते है।

> अंगार सिर पर रखना :
कष्ट सहना – तुम
किसके लिए सिर पर अंगार रहते है।

> अंगारे उगलना : कठोर बात
कहना – अंगारे क्यों उगल रहे हो
भाई |

> अंगारे बरसना : तेज धूप
पड़ना – गर्मी इतनी ज्यादा पड़
रही मानो अंगारे बरस रहे हैं |

> अंगारों पर लोटना :
ईष्या से जलना – सौतन
को सामने देख वह अंगारों पर लोटने लगी।

> अंगुठा चुसना : खुशामद
करना / धीन होना – स्वाभिमानी
कभी किसीका अंगुठा नहीं चुसते।

> अंचल पसारना : नम्रता से
मांगना – जरूरतमंद हर किसी के आगे
अंचल पसारता है।

> अंजर पंजर ढीले होना :
पुर्जो का बिगड़ जाना/अभिमान नष्ट होना/ अंग अंग ढीले होना – पैदल चलने पर उसके अंजर
पंजर ढीले जाते हैं |

> अंटी बाज : दगाबाज – उससे सावधान रहना, वह अंटीबाज है।

> अंटी में रखना : छिपाकर
रखना – पैसे उसने अंटी में छुपा
कर रखे हैं |

> अंधा बनना : जान-बूझकर किसी बात पर ध्यान न देना – सब जानते हुए भी क्यों तुम अंधे बने हुए हो |

> इज़्ज़त
बेचना  : अपने स्वाभिमान का सौदा करना – वह
हमारा दुश्मन है, उसके यहाँ काम करके अपनी इज़्ज़त मत बेचिये | 

> ईंट
का जवाब पत्थर से देना : दुष्ट के साथ दुष्टता का कठोर के साथ कठोरता का व्यवहार
करना – हमें कमज़ोर मत समझिए, हमें ईंट का जवाब पत्थर से देना आता है |

> ईंट से ईंट बजा देना  : सर्वनाश कर देना – हम से जो भी टकराएगा, हम उसकी ईंट से ईंट बजा देंगे |

> ईद
का चाँद होना : बहुत कम दिखाई देना, बहुत अरसे बाद दिखाई देना – जब से आपकी शादी हुई है,
आप तो ईद के चाँद
हो गए हैं ।

> ईमान
बेचना : झूठा व्यवहार करना, बेईमानी करना – जो लोग अपना ईमान बेच कर पैसे कमाते हैं वो
कभी सुखी नहीं रहते |

> उगल
देना : रहस्य / भेद प्रकट कर देना – माँ के डर से रोहन ने सारा भेद उगल दिया |

> उठते-बैठते
: हर समय, सरलता से – रमेश ने धीरज से कहा, मैं तो उठते बैठते ही १०० – २०० रुपये कमा लेता हूँ | 

> उड़ती
चिड़िया के पर गिनना  : मुश्किल बात को
तत्काल जानना – मैं उड़ती चिड़िया के पर गिन लेता मुझसे कुछ भी छिपाने की कोशिश मत
करना |

> उड़न-छू
हो जाना : चला जाना, गायब हो जाना – दीपांश ने राघव से कहा, यार उस दिन दो मिनट कह कर तुम तो
उड़नछू हो गए थे | 

> उधेड़बुन
में रहना : फिक्र में रहना, चिन्ता करना – किस उधेड़बुन में रहते हो, सौरभ ने राजा से पूछा |

> उम्र
ढलना : यौवनावस्था का उतार – ५५ वर्षीय राम प्रसाद ने ६० वर्षीय धर्मेश प्रकाश से
कहा, तुम्हारी
उम्र ढलने लगी है | 

>  उलटी-सीधी सुनाना : खरी खोटी
सुनाना, डांटना-फटकारना
– मुझसे अगर कोई बत्तमीज़ी करेगा तो मैं तो उसको उलटी-सीधी सुना दूंगी, वर्षा से शीतल ने  कहा | 

>  उलटे छुरे से मूड़ना : किसी को
उल्लू बनाकर उससे धन ऐंठना या अपना काम निकालना – अगर रिपोर्ट लिखाने के लिए पुलिस
स्टेशन जाओ तो पुलिस वाले हम गरीब लोगों को उलटे उस्तरे से मूंड देते हैं।

>  उलटे पाँव लौटना : तुरन्त बिना
ठहरे हुए लौट जाना – रमेश जैसे ही ऑफिस पहुँचा, घर से कोई फ़ोन आया और वह उलटे
पाँव घर को लौट गया | 

>  उल्लू का पट्ठा : निपट मूर्ख –
इतना भी नहीं समझते की रविवार को स्कूल की छुट्टी होती है, एकदम उल्लू के पट्ठे हो क्या ?

>  उंगली उठना : निन्दा होना,
बदनामी होना –
सूरज के पिता ने उससे कहा कि कभी कोई ऐसा काम मत करना जिससे हमारे खानदान पर कोई
उंगली उठाये |

>  उंगली पकड़कर हाथ पकड़ना :
थोड़ा-सा सहारा पाकर विशेष की प्राप्ति के लिए प्रयास करना – तुमको उंगली क्या
पकड़ाई तुमने तो हाथ ही पकड़ लिया | 

>  उंगलियों पर गिने जा सकना :
संख्या में बहुत कम होना – इस संस्था के सदस्य तो उँगलियों में गिने जा सकते हैं |

> उंगलियों
पर नचाना : इच्छानुसार काम कराना – उसको एक बार घर तो आने दो, अपनी उँगलियों पर नहीं
नचाया तो मेरा नाम बदल देना |

> ऊँच-नीच
समझाना : भलाई-बुराई, लाभ-हानि समझाना – ज्यादा ऊँच-नीच न समझाओ मुझे, अपने काम से काम रखो, मुझे मालूम है मुझे क्या
करना है  | 

> ऊँट
के मुँह में जीरा : अधिक आवश्यकता वाले के लिए थोड़ा सामान – मुझे ५ लाख रुपये की
ज़रुरत है, १०००० रुपये तो ऊँट के मुँह में जीरा है |

> ऊपर
की आमदनी : इधर-उधर से फटकारी हुई नाजायज रकम – आजकल सरकारी नौकरियों में ऊपरी
आमदनी कम हो गयी है |

> ऊपरी
मन से कुछ कहना : केवल दिखावे के लिए कुछ कहना – रमेश के चाचा ने उसे केवल ऊपरी मन
से आशीर्वाद दिया |

> ऊलजलूल
बकना : उल्टा सीधा बोलना, बातें करना – यह क्या ऊल जुलूल बक रहे, जुबान संभाल कर बात करो | 

> एक
आँख न भाना : बिलकुल भी अच्छा न लगना – सुजाता को पूजा एक आँख नहीं भाती |     

> एक
कान सुनना, दूसरे से निकालना : किसी बात पर ध्यान न देना – सूर्यांश अपने पिता की बात को
एक कान से सुन दूसरे से निकाल देता है |