डॉ. साधना जोशी ‘प्रधान’

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जीवन परिचय: जयपुर राजस्थान की रहने वाली डॉ. साधना जोशी ‘प्रधान’ का जन्म २७ अगस्त १९६५ को हुआ | इन्होने एम. ए. पीएच. डी. ( हिन्दी साहित्य-स्वर्ण पदक प्राप्त) किया है | इनके पति का नाम डॉ. नरेन्द्र कुमार प्रधान है| डॉ. साधना जोशी बनस्थली विद्यापीठ, सोना देवी सेठिया स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय, सुजानगढ चूरू, राजस्थान की पूर्व व्याख्याता हैं और वर्तमान में लेखन व समाज सेवा में संलग्न हैं |

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एक छंदमुक्त रचना – क्यों..??

तोड़कर लम्बी चुप्पी,
फट पड़ी थी वो,
उस रोज!

हालांकि,
अप्रत्याशित था उसका
यह विरोध के स्वर में
प्रतिकार करना….
पौरुष के अहं को
आदत कहाँ थी ?
उसके इस प्रखर स्वरूप की|

तभी तो..!
अवाक् सा..
.मुँह ताकता ही रह गया था वह!
मगर उसे तो एक दिन,
ज्वालामुखी बनकर फूटना ही था,
अपने असतित्व को
बरकरार रखने के लिए|

कब तक …?
हाँ कब तक…?
मौन सहती रहती वह अन्याय
कभी, त्याग के नाम पर,
कभी मर्यादा और शील के नाम पर|
कभी परम्परा की आड़ में,
कब तक रिवाजों की चौखट के पीछे,
ढकेलती रहती…अपनी हर खुशी!

कब तक ?
राख होते देखती अपने सपने,
मर्द के दर्प की चिता पर..!!
कब …तक..?
गलाती अपना तन-मन,
क्यों मिटने देती?
अपना समूचा वजूद!
संवेदना-शून्य समाज के
बर्चफीले व चट्टानी इरादों के नीचे
क्यों …?
बोलो क्यों…??