डॉ. शोभा श्रीवास्तव

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जीवन परिचय:

  1. डॉ॰ शोभा श्रीवास्तव
    1. पिता का नाम:- श्री शिवकुमार श्रीवास्तव
    2. माता का नाम:- श्रीमती रुक्मिणी श्रीवास्तव
    3. जन्मतिथि:- १४, सितम्बर।
    4. B–8, जीवन कालोनी, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ राज्य, भारत
    5. प्राचार्य, स्कूल शिक्षा विभाग
    6. विधा:- गीत, ग़ज़ल, कहानी, आलेख 8. प्रकाशित कृतियां:-
      * सुबह होने तक (कविता संग्रह)
      * झील में उतरा हुआ चांद (गजल संग्रह) * वतन के शहजादे (बाल कविता संग्रह)
    7. मंच संचालन:- राज्य एवं अंतर राज्य स्तर पर अनेक बार
    8. साहित्यिक अवदान के लिए राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत।

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गीत – प्रेम

आजकल गर्मियों का चला दौर है
खुशनुमा ये चमन हो दुआ कीजिए
सूखी- सूखी सी पंखुड़ियां कह रहीं
प्यार के चंद शबनम अता कीजिए
आजकल गर्मियों का चला दौर है……
१.
ये है तपती हुई जेठ की दोपहर
गर्म मौसम हठीला रुकेगा नहीं
प्रीत के जल में तुम जो भिगो दो मुझे
मन मेरा फिर कभी भी थकेगा नहीं
भावना के नए फूल खिलने लगें
फिर वही ठंडी-ठंडी हवा दीजिए
आजकल गर्मियों का चला दौर है……
२.
चलते- चलते जो पांवों में छाले हुए
साथ रहते थे मुझको संभाले हुए
फिर उन्हीं रास्तों से पड़ा वास्ता
हम उन्हीं मंज़रों के हवाले हुए
मेरे रहबर मुझे सूझता कुछ नहीं
हाथ अपने जरा फिर बढ़ा दीजिए
आजकल गर्मियों का चला दौर है……
३.
जानती हूं कि कठिनाइयां है बहुत
प्रेम पथ पर जो कोई भी संग- संग चले
धुल ही जाते हैं अश्कों में अक्सर प्रिये
खूबसूरत जो सपने नयन में पले
खुद से ज्यादा यकीं तुम पे करती हूं मैं
ऐसा न हो कि मुझको दगा़ दीजिए
आजकल गर्मियों का दौर है……
४.
प्रेम कान्हा के रंग- रूप जैसा ही है
प्रेम में ये ह्रदय ब्रज का आंगन लगे
प्रेम है राधिका का समर्पण मधुर
प्रेम मीरा के मोहन का दर्पण लगे
धरती- अंबर से ऊंचा भला प्यार को
और क्या नाम दूं ये बता दीजिए
आजकल गर्मियों का दौर है……