डॉ. रफ़ीक़ नागौरी

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जीवन परिचय: डॉ. रफ़ीक़ नागौरी उज्जैन मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं | १९९३ से थांदला (मध्य प्रदेश) में इतिहास के प्राध्यापक के रूप में सेवा की फिर मक्सी और उसके बाद माधव कॉलेज उज्जैन में २००३ से अब तक सेवा कर रहे हैं । पहली रचना १९९४ में इंदौर के पत्र में प्रकाशित । २००९ में हिन्दी कविता संग्रह उड़ान प्रकाशित। २०२० में ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरों में देश भर में उपस्थिति ।

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योग दिवस का गीत

बोझ बीमारियों का उतर जाएगा ।
योग कर ले तू जीवन संवर जाएगा ।

इसमें रोगों से लड़ने की ताक़त भी है ।
और दिल में जगाता यह हिम्मत भी है ।

भय का जो वायरस है, वह मर जाएगा ।
योग कर ले तू, जीवन संवर जाएगा ।

योग से रोग को हम भगाते रहें ।
और उपवन भी मन का सजाते रहें ।

घर में आनंद ख़ुद ही ठहर जाएगा ।
योग कर ले तू जीवन संवर जाएगा ।

योग का अर्थ पहुंचाएगा जोड़ तक ।
सांस की डोर पहुंचेगी इक मोड़ तक ।

आग में तप के तू भी निखर जाएगा ।
योग कर ले तू जीवन संवर जाएगा ‌।

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