गोपेंद्र कुमार “गौतम”

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गोपेंद्र कुमार सिन्हा “गौतम” जी एक सामाजिक और राजनैतिक चिंतक हैं | गोपेंद्र जी देवदत्त पुर पोस्ट एकौनी दाउदनगर औरंगाबाद बिहार के रहने वाले हैं |

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संस्मरण – पहला गुरु दक्षिणा डब्बा भर रसगुल्ला

एक शिक्षक उस वक्त कितना खुश होंगा,जब उसका कोई विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में सिर्फ अपने विद्यालय में ही नहीं अपने जिले में सर्वोच्च अंकों से पास हुआ हो और डब्बा भर मिठाई गुरु के सामने लेकर हाजिर हो।उस वक्त कितनी खुशी मिलेगी,यह सिर्फ महसूस किया जा सकता है।इसे शब्दों में बयां करना बहुत ही मुश्किलहै।यह बात पिछले वर्ष की है जिस दिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा मैट्रिक परीक्षा फल का प्रकाशन किया गया था।मैं अपने अध्ययन कक्ष में बैठा हुआ था और उस दिन आए मैट्रिक परीक्षा परिणाम पर कुछ विद्यार्थियों से चर्चा कर रहा था।हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारे कई बच्चे परीक्षा में शामिल हुए थे। उनमें से अधिकतर पास हो गए थे और एक दो अनुत्तीर्ण भी हुए थे।हमारी एक छात्रा जो इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में शामिल हुई थी बहुत ही अच्छे अंको से पास हुई थी।उसका भाई अपने हाथ में डब्बा भर रसगुल्ला लटकाए हमारे अध्ययन कक्ष में प्रवेश किया,और झुक कर मेरे पांवों को छूकर नमस्ते गुरुदेव कहते हुए हमारे सामने रसगुल्ला का डब्बा प्रस्तुत कर दिया और बोला दीदी ने आपके लिए भिजवाया है।यह देख कर मेरी आंखों से खुशी के आंसू निकलने को बेताब हो गए थे।मैं अपने पिछले आठ वर्षो के मेहनत का गुरु दक्षिणा जो पा लिया था।पहली बार किसी विद्यार्थी के दिया हुआ कुछ मैंने स्वीकार किया था क्योंकि आज मेरी प्रतिज्ञा सफल हुई थी।जो मैंने 17 मई 2011 को लिया था।विदित हो मैं वर्ष 2011 से लगातार गरीब और जरूरतमंद बच्चों को “देवकुल सामाजिक विकास और शोध संस्थान”के बैनर तले “गुरुकुल मुफ्त शिक्षा” केंद्र में सुबह शाम मुफ्त शिक्षा प्रदान करता आ रहा हूं जो आज भी चालू है।वैसे तो परीक्षा परिणाम मेरे उम्मीद के अनुरूप पूरी तरह नहीं रहा था।फिर भी उसने काफी अच्छे अंकों से परीक्षा उत्तीर्ण की थी।जो शायद उसके लिए बहुत था।पर मेरे लिए तो कुछ कम ही था,क्योंकि मैंने इस से काफी ऊपर की उम्मीद किया था।जिस पर पानी फिर गया,पर फिर आज तक हमारे गांव में मैट्रिक परीक्षा में सर्वोच्च अंक लाने वालों में सबसे ऊपर थी।उसके मेहनत और परिश्रम को मैं सलाम करता हूं।वैसे शिक्षक का पेट अपने विद्यार्थियों के परिणाम से कभी नहीं भरता।जिस तरह माता पिता को अपने बच्चों के कितना भी खा पी लेने के बाद भी लगता है बच्चे अभी भूखे हैं।यह उसके मेहनत और लगन का प्रतिफल था।उसके परिवार के सहयोग,माता-पिता और बड़ों का आशीर्वाद,उसके अन्य योग्य गुरुजनों की सलाह और सहयोग से यह परिणाम हासिल हुआ था।मैं उसके परिवार के सदस्यों गुरुजनों मित्रों का कृतज्ञ हूं,जिन्होंने उसके इस सफलता में कहीं ना कहीं अहम योगदान दिए था।मैं तो बस एक पथिक को राह दिखाने वाले गाइड की भूमिका में था।

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शहीदों को मेरा सलाम

देश के सपूतों को,
शहीद दिवस पर,
मैं पेश करता हूं,
बार-बार सलाम।
जिन लोगों ने,
देश के खातिर,
गवां दिये प्राण,
उन्हें मेरा सलाम।
देश की रक्षा,
करते हमेशा,
देश के जवान,
उन्हें मेरा सलाम।
विकट परिस्थिति में,
खड़े रहते हैं जो,
सीमा पर सीना तान,
उन्हें मेरा सलाम।
वीर सपूतों के,
पालक पोषक,
माता पिता को,
बार-बार प्रणाम।
जो गुरु उन्हें पढ़ाते ,
शौर्य,वीरता,उत्साह का,
अदम्य-अद्भुत ज्ञान,
उन्हें मेरा सलाम।
शहीदों के परिवार को,
उनके पालनहार को,
जो दें राष्ट्रभक्ति के ज्ञान,
उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम।
शहीद दिवस पर,
जो शहीदों को याद करें,
उन्हें मेरा सलाम,
हजार बार प्रणाम।।

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तुम बिन यारा

कैसे बताऊं ओ यारा,
तुम मेरा सबसे प्यारा।
कटता नहीं तुम बिन,
अब एक दिन हमारा।

सुनो मेरी धड़कन को,
समझ लो मेरे मन को।
रह नहीं पाते तुम बिन,
अब हम एक पल को।

तेरी याद मुझे सताती,
मेरे नैना तुझे बुलाती।
दिल है उदास तुम बिन,
हर पल तेरी याद रुलाती।

ओ तेरी मीठी मीठी बातें,
तेरी प्यार भरी जज्बातें।
जीने नहीं देती तुम बिन,
हर लम्हा मुझे तड़पाते।

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लघुकथा – स्टैंड अप

जैसे ही प्रार्थना की घंटी लगी सभी बच्चे दौड़ते भागते प्रार्थना स्थल पहुंच गए।अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं भी उपस्थित हो गए थे।लेकिन अभी तक आज प्रधानाध्यापक सुरेश बाबू किसी कारणवश विद्यालय में उपस्थित नहीं हो पाए थे।जो हर दिन प्रार्थना करवाया करते थे।बाद में पता चला वे कुछ दिनों के लिए अवकाश पर है,और विद्यालय के प्रभारी नरेंद्र बाबू को बनाया गया है।इस कारण उस दिन प्रार्थना करवाने की जिम्मेदारी सहायक और अब प्रभारी प्रधान शिक्षक नरेंद्र बाबू पर आ पड़ी थी।नरेंद्र बाबू को जैसे ही प्रभार मिलने की खबर मिली उनके हाव-भाव और चाल-ढाल में बदलाव आ गया था।वे अपने आप को अपने सहयोगी शिक्षक-शिक्षिकाओं से सर्वश्रेष्ठ समझने लगे थे।आज वे पहली बार बच्चों को प्रार्थना करवाने जा रहे थे।उनका स्वभाव बिल्कुल बदला बदला सा था।प्रार्थना स्थल पर पहुंचते ही ऊंची आवाज में बोले “स्टैंड अप”सावधान।सभी बच्चे उनके व्यवहार से वाकिफ थे डर के मारे बिना देर किए एक सीध में खड़े हो गए।उन्होंने कहा प्रार्थना शुरू कर,बच्चे प्रार्थना करने लगे।जैसे ही प्रार्थना समाप्त हुई,सारे बच्चे अपने-अपने वर्ग कक्ष की ओर प्रस्थान कर गए।नरेंद्र बाबू चुकीं आज प्रधानाध्यापक के प्रभार में थे।उन्होंने सभी शिक्षकों को अपने अपने वर्ग कक्ष में जाने के लिए आदेश दिया।पर वे यह भूल गए कि मैं भी किसी वर्ग कक्ष का वर्ग शिक्षक हूं।अपने बेफिक्र होकर कार्यालय में पांव फैला कर आराम करने लगे।इसी बीच किसी वर्ग कक्ष से बच्चों के कोलाहल की आवाज आई।नरेंद्र बाबू उंघते हुए वर्ग कक्ष की ओर बढ़े और दूर से ही अन्य वर्ग शिक्षकों के नाम ले लेकर कोसने लगे आप लोग किसी काम के नहीं है।आपलोग शिक्षा के द्रोही हैं। आप लोग देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।पर जैसे ही नौवीं कक्षा के दरवाजे पर पहुंचे उन्हें मालूम चल गया कि बच्चों की कोलाहल इसी वर्ग कक्ष से कार्यालय तक सुनाई दे रही थी। वे धड़-धड़ाते हुए अंदर प्रवेश किए और बिना कुछ पूछे विद्यार्थियों को भला बुरा कहते हुए पीटने लगे।इसी बीच एक छात्रा जिसका नाम काव्या था उसने उनकी छड़ी पकड़ ली।यह बात नरेंद्र बाबू को काफी नागवार गुजरी।उन्होंने उसे कार्यालय में बुलाया और सभी शिक्षकों को भी कार्यालय पहुंचने के लिए आवाज लगाई।साथ ही उन्होंने दो लड़कों को उसके माता-पिता को बुलाने के लिए भेज दिया।चुकीं काव्या का घर विद्यालय के पास ही था, और उसके माता-पिता घर पर ही थे।तुरंत विद्यालय पहुंच गए।सभी शिक्षक -शिक्षिकाएं भी कार्यालय के पास इकट्ठा हो गए और आपस में एक दूसरे से नरेंद्र बाबू के व्यवहार पर बातचीत करने लगे। कोई कहता अधिकार मिलते ही हिटलर बन गए हैं अपना टेटन टोते नहीं हैं और दूसरे के दोष ढूंढते चलते हैं।विद्यालय के सभी विद्यार्थी भी पहुंच चुके थे।काव्या भी वहीं बरामदे के एक पाये के सहारे टिककर निर्भीक रूप से खड़ी थी।नरेंद्र बाबू ने वहां उपस्थित उसके माता-पिता और अन्य शिक्षक शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए कहा,काव्या ने आज हमारे विद्यालय के अनुशासन भंग किया है।अब आप ही लोग बताएं,क्यों नहीं इसे विद्यालय से निकाल दिया जाए।ताकि भविष्य में कोई विद्यार्थी इस तरह विद्यालय के अनुशासन को भंग ना करे।नरेंद्र बाबू की बात खत्म होते ही एक अन्य सहायक शिक्षक गौतम बाबू जो कि पूरे विद्यालय में बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय थे।उन्होंने कहा आपकी बात ठीक है।आपके अनुसार अनुशासन भंग हुई है।लेकिन हमें काव्या के साथ-साथ वर्ग कक्ष के अन्य बच्चों का पक्ष भी सुन लेना चाहिए,तब किसी निर्णय पर पहुंचना चाहिए।इस पर सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं काव्या के माता पिता ने भी हामी भरी। सर्वप्रथम गौतम बाबू ने काव्य से पूछा बेटी तुमने यह क्यों किया? काव्या ने विनम्रता पूर्वक अपना पक्ष रखते हुए बोली श्रीमान आज हमारे प्रधानाध्यापक महोदय नहीं आए हैं इस कारण नरेंद्र सर को प्रधानाध्यापक पद की जिम्मेवारी निभानी पड़ी।लेकिन ये हमारे वर्ग शिक्षक भी हैं।सभी वर्गों में पढ़ाई शुरू हो गई थी।लेकिन हमारे वर्ग कक्ष में कोई शिक्षक नहीं आए इस कारण सभी बच्चे आपस में बात कर रहे थे। कुछ बच्चे वर्ग कक्ष में ही इधर-उधर दौड़ भाग भी कर रहे थे।जब हमारी आवाज कार्यालय तक पहुंची तो नरेंद्र बाबू उंघते हुए हमारे वर्ग कक्ष में आए और बिना कुछ कहे पूछे हम सभी को पीटना शुरू कर दिये। इसलिए मैंने इनकी छड़ी पकड़ ली।बस इतनी सी बात है।काव्या के बाद खत्म होते ही गौतम बाबू ने अन्य बच्चों की तरफ देखते हुए पूछा क्या बच्चों काव्या सही बोल रही है।सभी बच्चों ने एक सुर में हां बोल दिया।इस पर नरेंद्र बाबू आग बबूला होकर बच्चों की तरफ लपके।उनको आगे बढ़ते देख गौतम बाबू अपने आपे से बाहर आते हुए नरेन्द्र बाबू को डपटते हुए बोले “स्टैंड अप”।एक कदम भी आगे बढ़े तो हम से बुरा कोई नहीं हो सकता।आपको कुछ दिन के लिए जिम्मेवारी क्या मिल गई आप बिल्कुल निरंकुश हो गए!आपको अपने कर्तव्य का तनिक भी ख्याल नहीं है।आपको मालूम है हमारे प्रधानाध्यापक कुछ दिन के लिए छुट्टी पर है और शिक्षकों की संख्या वर्ग कक्ष के बराबर है फिर आप न तो किसी शिक्षक को नौवीं कक्षा की जिम्मेवारी सौंपी और न ही खुद अपनी जिम्मेदारी निभाई और उल्टे बच्चों के साथ मारपीट करने पर उतारू हैं।शर्म आनी चाहिए आपको कुछ दिन के लिए जिम्मेदारी क्या मिल गई।निरंकुश की तरह व्यवहार करने लगे हैं। वह तो ठीक हुआ पहले ही दिन आपको किसी ने हिम्मत कर रोक दिया।अन्यथा आप पूरे व्यवस्था को बर्बाद कर देते।आज नहीं तो कल आपको फिर से एक शिक्षक के रूप में ही कार्य करना है। केवल जिम्मेवारी ले लेने से कोई समझदार नहीं हो जाता।सभी को एक साथ लेकर चलने पर ही कोई संस्था देश और समाज आगे बढ़ सकता है।अन्यथा जिम्मेवारी छीनते भी देर नहीं लगती।अन्य सभी शिक्षकों शिक्षिकाओं ने भी गौतम बाबू की बात को सही ठहराया।काव्या के माता-पिता ने भी नरेंद्र बाबू को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर ना जाने की नसीहत देते हुए अपने घर लौट गए।सभी लोग काव्या के हिम्मत की दाद दे रहे थे कि आज अगर काव्या नरेंद्र बाबू के गलत व्यवहार का डटकर मुकाबला नहीं करती तो हमें ना जाने कब तक उनके गलत हरकत का शिकार होना पड़ता।

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लघुकथा – सहयोग

मंगर और गजोधर दो जिगरी दोस्त थे।दोनों का जन्म बिहार के औरंगाबाद जिले के एक सुदूरवर्ती गांव खेमनीचक के बहुत ही गरीब परिवारों में हुआ था। गांव में कोई पाठशाला नहीं था।दोनों अपने गांव से पांच किलोमीटर दूर दिलावरपुर पढ़ने जाते थे।वे दोनों दसवीं कक्षा में पहुंच चुके थे।उनका मैट्रिक परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन हो गया था और वे मैट्रिक परीक्षा की तैयारी में लगे हुए थे।अभी दो माह हुआ ही था इसी बीच मंगरा की तबीयत खराब हो गई। वह इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच अस्पताल में भर्ती हो गया।अब मात्र परीक्षा के कुछ महीने ही बच रहे थे।गजोधर लगातार तैयारी में जुटा हुआ था।इधर मंगला हॉस्पिटल से छूटकर जब घर आया तो अपने आप को पढ़ाई में बहुत ही पिछड़ा हुआ पाया।मंगरा के गांव लौटने की खबर जैसे ही गजोधर को लगी,वह तुरंत मंगरा के घर पहुंचा।वैसे जब से वह बीमार पड़ा था, गजोधर हमेशा मोबाइल फोन से हाल-चाल लेते रहता था। फोन पर ही उसे हर दिन परीक्षा से संबंधित बातें किया करता था।जिससे दोनों की तैयारी भी हो रही थी।गजोधर के देखते ही मंगरा दौड़ कर गले से लगा लिया और फूट-फूट कर रोने लगा।कहा भाई तूने मुझे बीमारी के दौरान भी फोन से बहुत सारी तैयारियां करवा दी है,पर मेरी तुम से एक विनती है।मैं पढ़ाई में बहुत पिछड़ गया हूं।तुम मेरे घर आकर मेरी तैयारी में सहयोग कर दोगे।गजोधर तुरंत तैयार हो गया और अगले दिन से उसके घर ही आकर दोनों साथ-साथ पढ़ने लगे।परीक्षा का दिन आया।दोनों साथ परीक्षा देने जाया करते और अपने तैयारी और समझ के अनुसार सभी प्रश्नों का हल उत्तर पुस्तिका में लिख कर आते।जब परीक्षा परिणाम आया तो दोनों मित्रों का परीक्षा परिणाम लगभग सामान था।गजोधर बेरासी प्रतिशत अंक लेकर उत्तीर्ण हुआ वही मंगरा साढे इक्कासी फिसदी अंकों के साथ पास हो गया था। मंगरा गजोधर के घर मिठाई का डब्बा लेकर पहुंचा और उसे मिठाई खिलाते हुए कहा गजोधर भाई यह तुम्हारे सहयोग का प्रतिफल है,अन्यथा मैं तो छह माह तक अस्पताल में पड़े रहने के बाद परीक्षा देने के काबिल भी नहीं रहता।तुमने मुझे विपरीत परिस्थिति में काफी सहयोग दिया है।इसके लिए मैं तुम्हारा जीवन भर शुक्रगुजार रहूंगा।मंगरा के मुंह से यह सब सुनते ही गजोधर की आंखों में आंसू आ गए।दोनों एक दूसरे के गले लगा कर रोने लगे।गजोधर के परिवार के सभी सदस्य वहां आ गए।गजोधर के पिताजी आगे बढ़कर दोनों को समझाते हुए बताए बेटा,मित्र और परिवार का परम कर्तव्य बनता है की अपने लोगों के दुख के समय उनका साथ दें,और यही नहीं मानव धर्म भी यही कहता है।चलो सभी बड़ों के पांव छू कर आशीर्वाद लो।अभी तुम लोगों को अपने गुरु जी के पास जाकर आशीर्वाद भी लेना है।दोनों मित्रों ने घर में उपस्थित सभी बड़ों का आशीर्वाद लिया और अपने गुरु जी से आशीर्वाद लेने के लिए उनके घर की ओर चल दिए।

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गौरवशाली बिहार भूमि

गौतम बुद्ध की ज्ञान स्थली,
महावीर की परिनिर्वाण भूमि।
गुरु गोविंद की अंगड़ाई स्थली।
आर्यभट्ट,बाणभट्ट के यह जन्मभूमि।
सबसे गौरवशाली यह बिहार भूमि।।

महात्मा गांधी की कर्म स्थली,
राजेंद्र प्रसाद की जन्म भूमि।
भिखारी ठाकुर की नृत्य स्थली,
दशरथ मांझी की यह प्रेम भूमि।
सबसे गौरवशाली यह बिहार भूमि।।

संपूर्ण क्रांति की प्रयोग स्थली,
बक्सर लड़ाई की यह रंगभूमि।
पीर अली की ललकार स्थली,
वीर कुंवर सिंह की यह वीर भूमि।
सबसे गौरवशाली यह बिहार भूमि।।

मेहनतकश लोगों की पसंद स्थली,
कर्पूरी ठाकुर,जगदेव प्रसाद और
लालूयादव के सामाजिक राष्ट्रवाद को
मशहूर करने वाली समाजवाद भूमि।
सबसे गौरवशाली यह बिहार भूमि।।

विपरीत परिस्थितियों में लोकतंत्र की
नई परिभाषा गढ़ने वाली पवित्र भूमि।
दुनिया के सबसे पुरानी गणतंत्र स्थली,
वह है वैशाली गणतंत्र की महान भूमि।
सबसे गौरवशाली यह बिहार भूमि।।

दीवार पेंटिंग की शुरुआत स्थली,
मधुबनी,मिथिला की कलाकार भूमि।
चंद्रगुप्त मौर्य की मगध साम्राज्य स्थली,
शेरशाह की वीरता की शानदार भूमि।
सबसे गौरवशाली यह बिहार भूमि।।

किसानी के लिए उपयुक्त गंगा स्थली,
लिटी चोखा के लाजवाब स्वाद भूमि।
केला,लीची,अमरूद की उपज स्थली,
मालदह आम की यह मिठास भूमि।
सबसे गौरवशाली यह बिहार भूमि।।

विंध्यवासिनी की सुर साधना स्थली,
बिस्मिल्लाह खान की रहनुमाई भूमि।
सच्चे दिलवालों की सच्चाई स्थली,
गोपेंद्र गौतम की यह रोशनाई भूमि।
सबसे गौरवशाली यह बिहार भूमि।।

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हिम्मती झांसी वाली रानी

भारत में हुई एक सच्ची थी,
वह बहादुर हिम्मती झांसी वाली रानी थी।
जब टूट पड़ी थी हाथों में तलवार लेकर,
अंग्रेजों को नाको तले चने चबवा थी।
मिल गया होता अगर साथ सिंधिया का,
खत्म होती गोरों के जुल्मों की कहानी थी।
दुर्भाग्यवश ग्वालियर घराने ने उस समय,
गद्दारी करके अंग्रेजों की अगुवानी थी।
अंग्रेजों के मित्र बनकर के सिंधिया ने,
उनको लूटने के लिए छोड़ी राजधानी थी।
राजशाही बचाने की लालच में प्रजा को,
जानबूझकर अंग्रेजों के चंगुल मे डाली थी।
खैर मनाओ उस वक्त राज्य वासियों ने,
आगे बढ़ कर के खुद कमान संभाली थी।
ग्वालियर राजघराना ने तो प्रजा का भी,
लोभ में पड़कर सौदा कर डाली थी।
उस समय जो सिंधिया ने काम किया था,
वह मादरे वतन के साथ बेमानी थी।
आज जो राजनीति में सिंधिया ने किया है,
वह भी राजनीतिक बेमानी है।
यह कुछ नहीं भारतीय लोकतंत्र में,
नेताओं की घोर मनमानी है।
इनकी आदत है जनता के पैसों पर,
अपनी राजशाही दिखानी है।
भोले भाले मतदाता हमेशा ठगे जाते हैं,
यही तो जनता की परेशानी है।
जहां लाभ देखते हैं आजकल के नेतागण,
तुरंत उड़कर उस डाल पर चल जानी है।
आज तक समझ न पाई भारतीय जनता,
अजब भारतीय राजनेताओं की कहानी है।
भारत में हुई एक सच्ची महारानी थी,
वह बहादुर हिम्मती झांसी वाली रानी थी।

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बेटियां लड़ लेती यमदूत से

कुछ लोगों के गंदे करतूत से,
बेटियां मौत मांग रही यमदूत से
फिर भी बेटियां लड़ लेती यमदूत से,
डरती हैं बस अपनों के ही करतूत से!!

रख कचड़ा साफ फर्श पर,
जो सफाई का ढोंग रचाते हैं!
पहुंच घर किसी अबला से,
इश्क लीला का रास रचाते हैं!
हर दिन न जाने कितने,
लोगों का अरमान उजाड़ते हैं!
अपने मन के कचड़े को कभी,
ये दरिंदे नहीं पहचानते हैं।।

तन की प्यास बुझाने के लिए,
किसी की बेबसी को न मानते हैं!
मन को कलुषित रखते हैं ये,
किसी का सम्मान कभी न करते हैं!
भेड़िया भी शरमा जाए इनसे,
ऐसा घिनौने कृत्य ये लोग करते हैं!
इन लोगों को किसी का डर नहीं,
कानून का खौफ कभी न पालते हैं!

नैतिकता इनकी ऐसी वैसी,
संस्कार का बाजार ये लगाते हैं!
गिद्ध जैसी हैं आंखें इनकी,
कुत्तों की तरह आचरण रखते हैं!
टूट पड़ते हैं किसी मासूम पर,
तनिक ना लाज ये लोग करते हैं!
बेशर्मी है इनको सबसे प्यारा,
नीचता का सभी ज्ञान ये रखते हैं!

झक सफेद कपड़ों से ऐसे लोग,
दुष्टता रूपी अपना तन ढकते हैं!
इंसानियत के नाम पर हैं ये कलंक,
हद से गिरी हुई मानसिकता रखते हैं!
समय पड़ने पर पकड़ कर कटोरा,
वोट का भीख भी गली-गली मांगते हैं!
जीत करके फिर भूल जाते हैं सभी को,
लाख याद दिलाने पर न पहचानते हैं!

ये पापी मासूमों के तन को भी,
अपने हवस का खिलौना मानते हैं!
इनसे अच्छे होते हैं जंगली जानवर,
अपने पराए का फर्क पहचानते हैं!
पहनकर चीर फकीर व संतों का,
ऐसे लोग दिल गुंडों का रखते हैं!
जब ऐसे लोग दिमाग शैतानी रखते,
फिर घुटनों तक तन क्यों ढकते हैं।

बेटियां तुम भी अब निडर बनो,
गीदड़ के लिए गीदड़ बनो!
चढ के उन दुष्टों के छाती पर,
शमशान पहुंचा दो खाटी पर!!
तुम माफ नहीं इन सबको करना,
तुम्हें अंधकार में जो लोग पहुंचाते हैं!
झटके में छीन लो प्राण उनके तन से
बोली तेरी जो हर दिन लगाते हैं!

कुछ लोगों के गंदे करतूत से,
बेटियां मौत मांग रही यमदूत से!!
फिर भी बेटियां लड़ लेती यमदूत से,
डरती हैं बस अपनों के ही करतूत से।

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युवा भारत को बहुस्तरीय युवा आयोग की जरूरत

भारत पूरी दुनिया में सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश है।आने वाले कुछ महीनों में देशवासियों की औसत आयु 29 साल होने की संभावना के साथ भारत दुनिया का सबसे युवा देश बन बनने का गौरव हासिल कर लेगा। 18 से 35 वर्ष के लोगों को आमतौर पर युवा माना गया है। 2011 के जनगणना के अनुसार देश के कुल एक अरब 21 करोड़ जनसंख्या में से इस आयु वर्ग की जनसंख्या लगभग 37 करोड़ है जो कुल आबादी का 31.27 फीसद है।वहीं 2021-31 में 20 से 59 वर्ष के आयु वर्ग की कार्यकारी जनसंख्या लगभग 55 फीसद होगी।वर्ष 2021 से 31 के दौरान औसतन हर वर्ष 97 लाख रोजगार के नए अवसर सृजित करने होंगे। भारतीय जनसंख्या के इस सबसे बड़े समूह के सपने को पूरा करने के लिए देश में एक ऐसे ढांचा विकसित करने की जरूरत है जो युवाओं को सही समय पर उनके हुनर कौशल और योगिता के अनुसार काम और रोजगार प्रदान कर सकें।यह तभी संभव है जब देश में बहु स्तरीय यह था राष्ट्रीय राजकीय जिला एवं प्रखंड युवा आयोग जैसे युवाओं को समर्पित एक संस्था हो जो उनके भविष्य के लिए कार्य नीति तैयार करे और उसे लागू करने के लिए व्यापक ढांचा का विकास करे।
पिछले दशक से जिस प्रकार त्वरित गति से भारत में युवा जनसंख्या के अनुपात में रोजगार के अवसर उत्पन्न नहीं हो पा रहे हैं यह बहुत ही सोचनीय विषय है। अगर समय रहते इस पर नहीं सोचा गया तो देश के सबसे सकारात्मक ऊर्जावान लोगों के ऊर्जा का देश हित में करने से देश चुक जाएगा।यही नहीं देश के सामने यह मौका काफी लंबे समय तक नहीं रहने वाला है क्योंकि आने वाले वर्षों में देश के आबादी का एक बड़ा हिस्सा प्रौढ़ावस्था की ओर बढ़ जाएगा जो देश के विकास की रफ्तार को बिल्कुल थाम देगा।इसलिए वर्तमान ऊर्जावान उम्र समूह को रोजगार से हर हाल में जोड़ना होगा।उनके भविष्य के साथ ही देश का भविष्य जुड़ा हुआ है। अगर युवाओं का भविष्य अंधकार में हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया के बेरोजगारों की राजधानी के तमगा हासिल कर लेगा।
अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार भारत के जनसंख्या के स्वरूप में वर्तमान में जो परिवर्तन हो रहा है,उसको ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ यानी जनांकिक लाभांश कहा जाता है।संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की परिभाषा के अनुसार,इससे आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।हालांकि साढ़े तीन दशकों तक युवाओं की संख्या कार्यबल में जुड़ती रहेगी,लेकिन देश के सामने 2035 तक ही यह सुनहरा अवसर है,क्योंकि उसके बाद से आबादी की औसत उम्र बढ़ने की गति तेज होने लगेगी।चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की सफलता में कामकाजी लोगों की जनसंख्या का अधिक होना बहुत सहायक रहा है।इतनी बड़ी आबादी के लिए काम और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना किसी भी देश के लिए बहुत बड़ी चुनौती है और अगर प्राथमिकता के साथ इस चुनौती का सामना नहीं किया जाए,तो यही जनसंख्या लाभ के जगह कई समस्याओं का कारण बन जाता है।शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार की समुचित व्यवस्था किये बिना विकास प्रक्रिया में युवाओं का समुचित उपयोग संभव नहीं है।लगातार सुधारों के बावजूद हमारे प्रशासनिक ढांचे, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सामाजिक सुरक्षा,स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तंत्र की गुणवत्ता निराशाजनक ही नहीं सवाल के घेरे में बना हुआ है।तकनीक और वित्तीय सेवाओं की पहुंच आम लोगों के बीच आज भी बहुत सीमित है।कुपोषण,निर्धनता, संस्थानिक भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से सही तरीके से नहीं निपटा जा सका है।देशवासियों के सामने रोजगार की कमी तो है ही,शिक्षित युवाओं के बड़े हिस्से के पास पूर्ण कौशल और दक्षता का अभाव व्याप्त है। अर्थव्यवस्था की गिरावट का नकारात्मक असर आमदनी, रोजगार,बचत और उपभोग पर सीधे-सीधे पड़ रहा है।सरकारी खर्च के अलावा कुल घरेलू उत्पादन के अन्य आधारों- निजी उपभोग खर्च,निवेश और निर्यात- की स्थिति लगातार चिंताजनक हालत में बना हुआ है।इन परिस्थितियों में सरकारों तथा औद्योगिक समूहों को अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक नीतियां व कार्यक्रम बनाना चाहिए। संस्थानिक और वित्तीय सुधारों को तेज करने के साथ अर्थव्यवस्था को निराशाजनक दौर से उबारने के लिए हो रहे उपायों को स-समय अमली जामा पहनाने पर जोर दिए जाने की जरूरत है।
देश वासियों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्पष्ट कार्यनीति तैयार हो जिससे भारत के भविष्य नवजात शिशुओं और बच्चों को स्वस्थ, सक्षम और कुशल बनाया जाए।स्वास्थ्य बीमा,टीकाकरण, चिकित्सा केंद्रों की संख्या बढ़ाने,ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता और स्वच्छता को प्राथमिकता देने जैसे सरकारी प्रयासों से भविष्य के लिए उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।इसी तरह की कोशिशें शिक्षा के लिए देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थान प्रति दस लाख जनसंख्या पर स्थापित किया जाना चाहिए एवं प्रत्येक 50 लाख जनसंख्या पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक एवं शोध संस्थान स्थापित किया जाना चाहिए। सर्वप्रथम प्रत्येक राज्य में हर क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिक एवं शोध संस्थान हर हालत में स्थापित होने चाहिए।देश में अकुशल और अर्ध कुशल लोगों के लिए कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।पर्यावरण के संकट का भी संज्ञान लेना जरूरी है।यदि जनांकिक लाभांश के इस मौके को हमने खो दिया,तो विकास और समृद्धि के हमारे सपनों को साकार होने में बहुत लंबा समय लग जायेगा।
अगर हम देश के युवाओं के बीच बेरोजगारी मोर्चे पर बात करें तो पिछले वर्ष सितंबर से दिसंबर 2019 के चार महीनों में बेरोजगारी की दर 7.5 फीसदी तक पहुंच गई है।यही नहीं, उच्च श‍िक्ष‍ित लोगों की बेरोजगारी दर बढ़कर 60 फीसदी तक पहुंच गई है।ग्रामीण भारत की तुलना में शहरी भारत में बेरोजगारी की दर ज्यादा है।रिपोर्ट के अनुसार, 20 से 29 साल के ग्रेजुएट युवाओं में बेरोजगारी की दर 42.8 पहुंच गई है जो भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। वहीं, सभी उम्र के ग्रेजुएट के लिए औसत बेरोजगारी दर 18.5 फीसदी पर पहुंच गई जो इसका उच्चतम स्तर है।इसी तरह का हाल पोस्ट-ग्रेजुएट के लिए भी है।कॉलेज से निकलर जॉब मार्केट में आने वाले युवओं की स्थिति भी बेहतर नहीं है। 20 से 24 साल के उम्र के युवओं के बीच सितंबर से दिसंबर के दौरान बेरोजगारी की दर दोगुनी होकर 37 फीसदी पर पहुंच गई है।
इतनी बड़ी बेरोजगार युवा जनसंख्या को देश हित में सही तरीके से उपयोग करने के लिए हर हाल में राष्ट्रीय युवा आयोग जैसे संस्थान की जरूरत है।जो युवाओं के हित और जरूरतों को पहचान कर कोई निर्णय ले सके। देश के प्रत्येक जिलों में फिर से नियोजनालय को कार्यरत बनाया जाना चाहिए।जहां युवा रोजगार के लिए अर्जी दे सके।इससे देश को पता चलेगा वास्तव में रोजगार खोजने वाले युवाओं की कुल जनसंख्या कितनी है। वे किस प्रकार के रोजगार ढूंढ रहे हैं उनके पास कैसी योग्यता और क्षमता है।अगर देश को यह सब मालूम चल जाएगा तो उनके लिए बेहतर नीति बनाया जा सकेगा।
युवा जनसंख्या को समय पर अगर नहीं संभाला गया तो जिस तरह से पिछले कुछ वर्षों में देश के कोने कोने से युवाओं के द्वारा गलत राह पर पैर रखने की खबर मिलती रहती है वह बढ़ने की आशंका है।युवा रोजगार न मिलने के कारण कुंठा के शिकार होते हैं और गलत निर्णय लेने को मजबूर हो जाते हैं उन्हें पता नहीं चलता क्या सही और क्या गलत है।उन्हें चौतरफा आलोचना का शिकार होना पड़ता है।जिससे वे विचलित हो जाते हैं।एक तरफ उनके पास रोजगार नहीं होता दूसरी ओर उनकी जरूरतें और जिम्मेदारियां दिनोंदिन बढ़ती जाती है जिसे वे पूरा करने में नाकाम होते हैं।यही नहीं घर परिवार समाज हर लोग की उम्मीद पर खरा उतरना युवाओं के लिए मुश्किल हो जाता है।देश में घटित होने वाले अपराधों का अगर विश्लेषण किया जाए तो 80 फ़ीसदी से अधिक नौजवान ही इसमें शामिल होते हैं जिनके पास कोई काम धंधा नहीं है।लड़ाई झगड़ा दंगा फसाद करने वाले लोग अधिकतर इसी आयु वर्ग के वे लोग होते हैं। खाली मन शैतान का मुहावरा इन के लिए बिल्कुल सच साबित होता है।बिना काम धंधा के खाली इधर उधर टहलते रहते हैं इसलिए वे किसी के बहकावे में आकर अपने भविष्य को बर्बाद कर लेते हैं।पिछले दिनों दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में मारे गए लोगों में से अधिकतर इसी आयु वर्ग के लोग थे।सही मार्गदर्शन के अभाव में है विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा पीढ़ी भी सड़कों पर नारे लगाने लगते हैं जिन्हें देश के भविष्य के लिए काम करना चाहिए वह देश तोड़ने की बात करने लगते हैं।राजनीतिक रैलियों में पहुंचने वाले भीड़ का सबसे बड़ा हिस्सा यही बेरोजगार युवा होते हैं जिसका लाभ देश के राजनीतिक लोग उठाते हैं पर उन्हें उसके बदले उनके हाथों में झंडा और डंडा एवं दिमाग में नफरत और अवसाद के सिवा कुछ नहीं मिलता।
हर हाल में युवा जनसंख्या को भारत के नव निर्माण में योगदान देने लायक बनाना होगा।अगर इसके लिए राष्ट्रीय स्तर,राज्य स्तर,जिला स्तर एवं प्रखंड स्तर पर युवा आयोग का गठन किया जाए तो युवाओं के साथ-साथ देश को भी बहुत लाभ होगा।