कवि शिवम गर्ग

(स्नातक) अररिया, बिहार |

मेरी सांसे
आज इतनी तेज हो कर
ये मुझे क्या कह रही है,
मेरे दिल से उठी ये कराह
क्या जता रही है,
की तू भी अब इस जमाने में
एक नया गम लिए घूमता फिरेगा,
जैसे दिलजले घूमते हैं,
आखिर क्या हो गया है
मेरे दिलो दिमाग को,
ऐसा क्यूं लग रहा है कि,
तारा नहीं चांद ही टूट गया
आज आसमां से,
यानी अब रातों को आसमां फिका लगेगा,
वजूद नहीं मिटा है आसमां का,
है बहुत सारे तारें अब भी,
लेकिन तारें, बगैर चांद के चमकेंगे क्या ?
ख्याल आ रहा है…!——————————- २५ जुलाई २०१९ |

– मेरा गांव  मुझे बुलाता है –

मेरा गांव मुझे बुलाता है,
चैन की नींद सुलाता है,
दुनिया की भाग दौड़ से दूर,
सुकूं का आभास कराता है,
मेरा गांव मुझे बुलाता है।

अच्छे है रिश्ते वहां के,
आते है फरिश्ते वहां पे,
कब आए ? कैसे हो ?
जैसे प्रश्नों से अपनेपन का
भाव जगाता है,
मेरा गांव मुझे बुलाता है।

सोने सी खुशबू है
गांव की माटी में,
हर किसी को ये
अपनी गोद में सुलाता है,
मेरा गांव मुझे बुलाता है।

शहर की चकाचौंध में,
मैं कही भूल भी जाऊं
अपनी इस माँ को
लेकिन मेरा ये गाँव,
मुझे नहीं भुलाता है,
मेरा गांव मुझे बुलाता है। ——————— २४ जुलाई २०१९ |

7 thoughts on “कवि शिवम गर्ग

  1. Bahut sunder 💯🏅👌
    Awesome
    Aapki rachna bahut hi behtarin hai
    Aap isi Tarah kosis Kare
    God bless you 🙏

  2. यह मेरी पसंदीदा रचनाओं में से एक है… 😊😊💕

    1. बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार दीप भाई 💓🙏

  3. Kya baat hai bhai aap isi tarah koshish kerte rehe aapse kalpana kerte hai agle renu ji aap hin hoge Koshish kerne walo ki kabhi haar nhi hoti bhai
    Hard work is the key to success

  4. Bahut hi aachi kavita hai Bhagwan kare ki tum aayese hi aage badho humlogo ka aashirwad tumahare sath hai. God Bless you chote..

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