|कवि विक्रम कुमार, बिहार|

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जीवन परिचय: कवि विक्रम कुमार, बिहार के वैशाली ( मनोरा ) ज़िला के रहने वाले हैं | इनके पिता का नाम श्री शंभु साह है | इन्होने बी. कॉम. में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है | इनकी लिखी हुई कविताओं में काफी गहराई देखने को मिलती है | इन्हे विभिन्न सम्मान पत्रों से सम्मानित किया जा चुका है | अब तक लगभग ३०० रचनाएँ भारत के आलावा अमेरिका , कनाडा एवं इंग्लैंड के विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं ।

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मुक्तक
दिल के मामलों में हम जहाँ से बड़े हैं
दिल तुमको देने को लिए हाथों में खड़े हैं
लोगे तुम नहीं बिना दिए हम जाएंगे नहीं
तुम जिद पे अडे़ हो तो हम भी जिद पे अडे़ हैं

लाख मुश्किलें इस जिंदगी के रास्ते में है
जो देखता कहता है कि बंदा मजे में है
तंगहाली में गिरा जो भूख से एक दिन
कहने लगे सब लोग कि ये तो नशे में है

गर रिश्ता किसी दिल से अपने दिल का जोड़ना
जो हाथ थामना तो कभी भी न छोड़ना
होगा ज्यादा अच्छा कि प्यार न करना
पर झूठे प्यार से किसी का दिल न तोड़ना

रोता हूं गर तो आंखें नम दिखाता मैं नहीं
हो दिल में चाहे लाख गम जताता मैं नहीं
दे दी कसम जो तुमने तो कहना पड़ा मुझे
क्योंकि अपनो झूठी कसम खाता मैं नहीं

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श्रीराम जीत गए
भारत में भक्ति भाव के आयाम जीत गए
वनवास हुआ खत्म और श्रीराम जीत गए

वर्षों चली जद्दोजहद हक को जताने की
राम जन्मभूमि को अपना बताने की
धैर्य रखा श्रीराम ने मां जानकी के संग
लक्ष्मण भरत भी चुप थे देख के रंग-ढंग

धैर्य सहनशीलता के नाम जीत गए
वनवास हुआ खत्म और श्रीराम जीत गए

दशरथ रघु की यश भूमि राम को मिली
पाया जहां था जन्म भूमि राम को मिली
वर्षों का अंधेरा छंटा प्रकाश- पुंज उठा
चारों ओर जय श्री राम से गूंज उठा

आगाज भी सही था ,अंजाम जीत गए
वनवास हुआ खत्म और श्रीराम जीत गए

सदियों पुरानी लौटी फिर पावन परंपरा
आनंद में आकाश है हर्षित हुई धरा
खुश हो पवन अवध में तोरण बना रहा
सूरज भी खुश है चांद भी खुशियां मना रहा

ऐसा लगे कि जैसे चारों धाम जीत गए
वनवास हुआ खत्म और श्रीराम जीत गए
वनवास हुआ खत्म और श्रीराम जीत गए

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निशानियां मिटती नहीं
वक्त के पन्नों से कोई कुर्बानियां मिटती नहीं
मिटते भले निशान हैं निशानियां मिटती नहीं

तयशुदा हर चीज की पूरी मियाद रखता है
अपने मन में जाने ये क्या मुराद रखता है
पहचान उसके जाने के भी बाद रखता है
वक्त हर किसी को पूरा पूरा याद रखता है

चाहे कुछ हो वक्त की वो वाणियां मिटती नहीं
मिटते भले निशान हैं निशानियां मिटती नहीं

बहके कभी कदम जो तो रोके पुकारे वक्त ही
क्या गलत है क्या सही देता इशारे वक्त ही
लहरों से हों परेशान तो देता किनारे वक्त ही
बिगाड़ता भी वक्त है जीवन संवारे वक्त ही

शत्रु बने जो वक्त परेशानियां मिटती नहीं
मिटते भले निशान हैं निशानियां मिटती नहीं

ना घमंड ना ही अभिमान करें वक्त का
धैर्य से हम रास्ता आसान करें वक्त का
वक्त की पूजा करें गुणगान करें वक्त का
आओ मिलके हम सभी सम्मान करें वक्त का

मान न हो वक्त का तो हानियां मिटती नहीं
मिटते भले निशान हैं निशानियां मिटती नहीं

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” इसरो के लोगों मत घबराना “

आपका हौसला चट्टानी है , हिम्मत आपकी बड़ी महान
इसरो के लोगों मत घबराना है आपके पीछे हिन्दुस्तान
किया परिश्रम कड़ी लगन से यह हम सबको मालूम है
हैं आप दुखी अब अंतर्मन से यह हम सबको मालूम है
है मेहनत हाथ में अपने सफलता किस्मत की है बात
परिणाम यहां हो चाहे कुछ पूरा भारत है आपके साथ
जारी रखें बुलंदियों से आप इसी अभियान को
इसरो वालों है गर्व आप पर पूरे हिन्दुस्तान को
विजयी होने की नींव छुपी है काल्पनिक से हार में
अमेरिका को यही सफलता मिली सत्रहवीं बार में
नमन हमारा आपको है इस ऐतिहासिक प्रयास पर
उम्मीदों की आस न छोडे़ं टिका है जग विश्वास पर
निश्चय ही मिलेगी सफलता एक दिन पहुंचेगा चांद पर चंद्रयान
इसरो के लोगों नमन आपको करता पूरा हिन्दुस्तान
इसरो के लोगों मत घबराना है आपके पीछे हिन्दुस्तान————————०७ सितंबर २०१९

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शिक्षक दिवस विशेष – गुरु का मान बढा़ना है हमें

भले ही देना ना उपहार कभी गुरुओं को
मगर देना सदा सत्कार सभी गुरुओं को
पुराणों ने कहा है वेदों ने भी माना है
ईश का धरती पे आकार छवि गुरुओं को
शिक्षक दिवस पे ये अभियान बढा़ना है हमें
गुरु का जग में सदा मान बढा़ना है हमें

गुरु से नैतिकता सद्गुण बने हैं यहां
गुरु से राम और अर्जुन बने हैं यहां
गुरु से ज्ञान की ज्योति है जली सदियों से
गुरु के महिमा की कथाएं चली सदियों से
चली जो सदियों से गुणगान बढा़ना है हमें
गुरु का जग में सदा मान बढा़ना है हमें

गुरु ही शिक्षा का प्रसार करते दुनिया में
निश्चलता का सदा ही भाव भरते दुनिया में
गुरु की साधना से धीर समंदर बन गए
गुरु से ज्ञान पाके लोग सिकंदर बन गए
बन के दूजा सिकंदर शान बढा़ना है हमें
गुरु का जग में सदा मान बढा़ना है हमें

गुरु का मान घटा भूलवश का क्या मतलब ?
न हों भगवान तो पूजन – कलश का क्या मतलब?
करना होगा अब मंथन कड़ा हम सबको ही
गुरुभक्ति के बिन शिक्षक दिवस का क्या मतलब?
गुरुभक्ति का कीर्तिमान बनाना है हमें
गुरु का जग में सदा मान बढा़ना है हमें
गुरु का जग में सदा मान बढा़ना है हमें——————————-०४ सितंबर २०१९

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” तुम्हारे नाम में डूबा मेरा हर एक पल कर दो “

मेरे दाता मेरे ईश्वर मेरा जीवन सफल कर दो
बसा लो मुझको चरणों में,रख लो पास ही मुझको
करुं हर पल तेरी सेवा ,बना लो दास ही मुझको
प्रभु सुंदर हो मेरा आज,सुनहरे मेरे कल कर दो
मेरे दाता मेरे ईश्वर मेरा जीवन सफल कर दो
हुआ है सृष्टि का यूं सफल निर्माण तुमसे ही
सभी में चेतना तुमसे ,सभी में प्राण तुमसे ही
मोहक छवि अपनी मेरे दिल में अचल कर दो
मेरे दाता मेरे ईश्वर मेरा जीवन सफल कर दो——————————-०४ सितंबर २०१९

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“तीज पर खुशियों का उपहार”

खुशहाली आए सपनों को एक नयी रफ्तार मिले
अबकी तीज पे हर पत्नी को खुशियों का उपहार मिले

कद्र हो उनकी भावनाओं का मान मिले जज्बातों को
दे सूरज मुस्कान दिवा में खुशियां चंदा रातों को
चारों ओर खुशियां ही खुशियां एक ऐसा संसार मिले
अबकी तीज पे हर पत्नी को खुशियों का उपहार मिले

जो भी जुडा़ हो उनके मन से वो सब उनपे नाज करे
वो अपने पावन सत्कर्मों से हर दिल पर राज करे
प्रेम स्नेह वो बांटे सदा ही सबका उसको प्यार मिले
अबकी तीज पे हर पत्नी को खुशियों का उपहार मिले
अबकी तीज पे हर पत्नी को खुशियों का उपहार मिले———————————०२ सितंबर २०१९

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“गणपति बप्पा आए फिर से”

उल्लास से भरे दिन पावन,खुशियों की लाली लेकर
गणपति बप्पा आए फिर से समृद्धि खुशहाली लेकर

ऋद्धि-सिद्धि साथ हैं आई चूहे बाबा भी आए
उनकी प्यारी छवि निराली भक्तों के मन को भाए
भक्त सारे खड़े हैं देखो पूजन की थाली लेकर
गणपति बप्पा आए फिर से समृद्धि खुशहाली लेकर

अबकी बप्पा के पूजन का उत्तम है प्रबंध
कोई लिए खड़ा हाथ में धूप दीप सुगंध
कोई बप्पा की खातिर है खड़ा पुष्प डाली लेकर
गणपति बप्पा आए फिर से समृद्धि खुशहाली लेकर

बप्पा ऐसा वर दे दो कि धन दौलत और ज्ञान मिले
प्रतिष्ठाएं मिले सदा ही मान मिले सम्मान मिले
जहाँ भी जाएं हम आएं अशेष असंख्य ताली लेकर
गणपति बप्पा आए फिर से समृद्धि खुशहाली लेकर
गणपति बप्पा आए फिर से समृद्धि खुशहाली लेकर ————————-०२ सितंबर २०१९

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