कवि जितेंद्र कुमार

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जीवन परिचय: जितेन्द्र जी बिहार प्रदेश के समस्तीपुर जिला के ताजपुर के रहने वाले हैं | उनका जन्म १६ अप्रैल १९९२ को हुआ | जितेन्द्र जी ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय,दरभंगा (बिहार) से इतिहास में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की है | उनका व्यक्तित्व उनकी रचनाओं में साफ़ साफ़ दिखाई देता है |

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बेटी_दिवस

ख़ुदा का नायाब तोहफ़ा है,बेटी
तू किसी की गीता,किसी की क़ुरान है,
ख़ुदा की रहमत बरसे जिस पर,
उसे ही,बेटी का मिलता सम्मान है।

जिस घर में हो बेटी वो जन्नत समान है,
जिस घर में न हो वो घर बंजर मैदान है।

जिसको मिला सुख बेटी का,
उसके लिए बेटी वरदान है।
जो करे बेटी की इज्ज़त वो भगवान है,
जिसे न मिला बेटी का सुख,वो अभागा इंसान है।

आप सभी को “बेटी दिवस” की शुभकामनाएं। ————- २२ सितम्बर २०१९

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“असल में फूलों का श्रृंगार है तितलियाँ”

देखो,रंग बिरंगे फूलों पर,
हरियाली की चादर पर,
कभी इस फूल पे,
कभी उस फूल पे,
ये चंचल तितलियाँ।

असल में,
फूलों का श्रृंगार है,
ये चंचल तितलियाँ।

प्राकृतिक के शौन्दर्य में,
अपने रंगों से रंग भारती,
अठखेलियाँ करती है,
ये चंचल तितलियाँ।
फूलों के शौन्दर्य का,
कोई मोल नहीं,
उसपे न हो अगर,
ये चंचल तितलियाँ।

असल मे,
फूलों का श्रृंगार है,
ये चंचल तितलियाँ।

जब मै,छोटा बालक था,
रंगबिरंगे तितलियों को
फूलों पे देखा करता था,
तब,मेरे मन मे
विचार आता था,
तितलियों को छूने का।

असल मे,
फूलों का श्रृंगार है,
ये चंचल तितलियाँ।

जब मैं,
उसे छूने को आगे बढ़ता था,
तब वो इधर,उधर उड़ जाती थी,
जब कभी मैं उसे छू लेता था,
उसके पंखुड़ितों के अनेक रंग,
मेरे उंगलियों पे लग जाती थी
और फीकी पड़ जाती थी,
रंगबिरंगी,खुबशुरत
ये चंचल तितलियाँ।

असल मे,
फूलों का श्रृंगार है,
ये चंचल तितलियाँ।

तब मै,
बालक ना समझ था,
उसके नाज़ुक पंखुड़ियों पे
सजे,
अनेक खुबशुरत रंगों से,
जो उसके खूबशूरती में
चार चाँद लगाती थी,से
मै अनजान था।
उस समय मुझे क्या पता था..
बिना रंगों के फीकी लगती है,
ये चंचल तितलियाँ।

असल मे,
फूलों का श्रृंगार है,
ये चंचल तितलियाँ।

हसीन वादियों को सजाती है,
फूलों में चार चाँद लाती है,
ये चंचल तितलियाँ।
सुकून मिलता है मन को,
जब हसीन वादियों में
रंगबिरंगी उड़ती है,
ये चंचल तिलतियाँ।

असल मे,
फूलों का श्रृंगार है,
ये चंचल तितलियाँ।

अपने रंगों से
प्राकृतिक के शौन्दर्य को
सजाती है,
ये चंचल तितलियाँ।
सब के मन को भाती है,
मेरे मन को भी भाती है,
रंगबिरंगी,नाजुक,कोमल,
ये चंचल लितलियाँ।

असल मे,
फूलों का श्रृंगार है,
ये चंचल तितलियाँ। ————- १९ सितम्बर २०१९

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