कवि कमल कुमार

मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश |

शिक्षक दिवस पर एक शिष्य द्वारा अपनी अध्यापिका को लिखी गई विनम्र स्नेह पंक्तियाँ———————–
कुछ भावनात्मक अपेक्षाएं हैं आपसे मेरी जमाने में किसी से कोई आस नहीं है,,
मैं स्वयं जीता हूँ ओरो के दम पे आपको कुछ देने को मेरे पास नहीं है,,
बस ह्रदय के भावों से निकले अल्फाज़ो को, मैं आपके चरणों में अर्पित करता हूँ,,
जो भी है इस समय देने को पास मेरे मैं आपको समर्पित करता हूँ,,
जब आपसी गुरुमाताजी आई थी मेरी ज़िंदगी में,,
मैं उस महत्वपूर्ण घड़ी का शुक्रिया अदा करता हूँ,,
भले ही कुछ न दे पाऊँ मैं आपको, पर ह्रदय की गहराई से नमन आपको सदा करता हूँ,,
जो आत्मिक रिश्ता जुड़ा है आपसे ये मेरा रिश्ता ये कभी भी टूट ना पाएगा,,
मैंने ममता के मोह में पकड़ा है आपका ये दामन,,
दामन ये कभी भी छूट ना पाएगा,,
कुछ नामुराद लोगों ने नकारात्मक भावनाएं रखी है मेरे-आपके प्रति,,
देखना वक़्त के साथ उनका भी नजरिया बदल जायेगा,,
मैं तो कमल हूँ हर फ़िजा में खिलने की फितरत है मेरी,,
लेकिन वक़्त के साथ मेरा भी दरिया बदल जायेगा,,
आपसे इस रिश्ते को निभाने का मैंने खुदी से वादा किया है,,
इतनी प्रीत तो किसी से भी ना रखी जमाने में मैंने,,
आपसे तो स्नेह सबसे ज्यादा किया है,,
खुद को समझता हूँ मैं पुत्र आपका, मगर जमाने की निगाहों में मैं आपका शिष्य हूँ,,
दुनिया की नजरों में आप वर्तमान हो स्वयं का,,
मगर मेरी आत्मा की निगाह में मैं आपका भविष्य हूँ,,
भागदौड़ भरे इस जीवन से फुर्सत के कुछ पल निकालकर मैं आपसे मिलता रहूँगा,,
हमारा ये समाज कीचड़ से भरा एक दरिया है मगर मैं इसमें कमल की भाँति खिलता रहूँगा।।
शिष्य का नाम “कमल”।। —————————०५ सितम्बर २०१९

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इतनी नफ़रत ना लुटा मुझपे ऐ हमनशीं,प्यार की थोड़ी सी तो आस रहने दे,,
ये एक अदा है मेरी सबके दिलों में बस जाने की इसे तो मेरे पास रहने दे,,
तू ना कल आम था ना आज आम है, इस दिल की निगाहों में खुद को तू खास रहने दे।।

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हाड़ माँस के घर में रहती है जो मैं वही इक नन्ही सी जान हूँ,,
मगर मुझसे ही वजूद है इस घर का मैं इस घर की शान हूँ,,ग
लतियां नादानियां मैं करना नहीं चाहती हो जाती है क्योंकि मैं एक इंसान हूँ।।

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जब मुलाकात होती है मेरी आप जैसे अच्छे लोगों से
तो दुनिया मुझे स्वर्ग नज़र आती है,,
फिर आपकी प्यारी सी आदतें मेरे दिल में घर कर जाती है,,
लेकिन जब नकारात्मक लोगों से मेरा पाला पड़ता है,,
बस उसी वक़्त मेरे दिमाग का पारा चढ़ता है,,
फिर एसे लोगों को मैं किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करता,,वै
से कभी कभी मैं भी नकारात्मक हो जाता हूँ इस बात से तो मैं इन्कार नहीं करता,,
सभी से वफ़ा की उम्मीद रखता हूँ,, मगर हर किसी से मैं इज़हार नहीं करता,,
दुनिया में समझता हूँ सभी को मैं अपना,,
मगर हर कोई तो मुझे भी प्यार नहीं करता।।

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शिकायतें बहुत है मुझे खुद से
इसलिए किसी से कोई गिला नहीं करता,,
गुलाब चमेंली या लिली ना समझना कमल हूँ जनाब,,
प्यार के कीचड़ की चाह रखता हूँ,
नफ़रत के दरिया में खिला नहीं करता।।

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