कवि आलोक शुक्ला “अनूप”

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जीवन परिचय: कवि आलोक शुक्ला अनूप जी इटारसी मध्यप्रदेश में रहते हैं | इनका जन्म दिनांक ०९ फरवरी १९७४ को हुआ | इन्होने प्रारंभिक शिक्षा इटारसी से प्रारंभ की फिर मास्टर ऑफ फिलॉसफी किया | यह मुख्य रूप से अध्यापक है |

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कोई हथेलियां जोड़कर दुआ मांगता l
कोई हथेलियां खोलकर दुआ मांगता ll
दुआएं तो एक ही मालिक तक पहुचती l
फिर इंसा क्यूँ, दुआ में फासले बनाना चाहता ll

तितलियों सा अपने दिलों को रखना l
फूलों सी रंगीन महफिलों को रखना ll
जिन्दगी बड़ी छोटी सी है, जनाब l
अपनो से शिकवों – गिलों को दूर ही रखना ll

किसी का प्यार चाहिए, तो उसे प्यार करो l
पहले तुम उसके लिए दुआ बार बार करो ll
प्यार, खेरात नहीं मुफ़्त ही मिल जाए l
प्यार पाने के लिए प्यार को निसार करो ll

सभी को बांटकर अपनी छाया, दरख्त सुकून मे हे l
फिर भी हम क्यों कुल्हाड़ी से मोहोब्बत करते ll
वो सिखाता है, बाँटने का मजा क्या है l
ओर एक हम हैं, जो उनकी हिफाजत नहीं करते ll ———————– १५ अगस्त २०१९ |

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जन्नत की बात करना बिलकुल फिजूल है l
सभी के दिलों में तो खुदा रसूल है ll
सभी को प्यार कीजिए, एहतराम दीजिए l
जिन्दगी जीने का यही उसूल है ll
जी चाहता है, दींन ए इलाही चला दूँ l
सब मजहबों को जोड़कर उनको मिला दूँ ll
इंसान हों, इंसानियत हो ओर कुछ भी नहीं l
सभी के दिलों में प्यार के फूल खिला दूँ ll
अपने दिलों को सदा मोहोब्बत भरा रखना l
अपने ईमान को सदा सोने सा खरा रखना ll
खुदा के पास अकेले ही जाना होगा l
इस सफर में परायों का भी ख्याल जरा रखना ll
आज ख्वाब में आना मुस्कुराना जरा
में तुम्हें तन्हाई में जी भर के देखना चाहूँ
जब भी मिलते हो भीड़ में मिलते
आज इस मंजर में दिल की बात केहना चाहूँ| —————– ०७ अगस्त २०१९ |

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“दोस्तों के नाम”

तुम् अपने दोस्तों को बेइंतहाँ मोहोब्बत करना l
उन्ही के लिए जीना, उन्ही के लिए मरना ll
खुदा भी इस प्यार पर अपनी इनायत रखते हैं l
ये दिलों के रिश्ते हैं, इनको मजहब से क्या करना ll
जी चाहता है, दींन ए इलाही चला दूँ l
सब मजहबों को जोड़कर उनको मिला दूँ ll
इंसान हों, इंसानियत हो ओर कुछ भी नहीं l
सभी के दिलों में प्यार के फूल खिला दूँ ll ———– ०४ अगस्त २०१९ |

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“नेकियाँ कीजिए”

अपने चेहरे को साफ करने से बेहतर होगा l
दिल के आईने को साफ कर लिया जाए ll
अपने दोस्तों को तो सभी प्यार करते हैं l
अपने दुश्मन को भी मुआफ कर लिया जाए ll
दुआ में जितना गहरा असर है l
बद्दुआ में उससे ज्यादा कहर है ll
लेना नहीं भूलकर भी ये किसी से l
उसके दिल में भी खुदा का घर है ll ———– ०४ अगस्त २०१९ |

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अपने किए वादे, बार बार तोड़ लेता हूँ l
फिर दुखी दिल से, तुझसे रिश्ता जोड़ लेता हूँ ll
मुझे खबर है तू मेरी हर गलती मुआफ करेगा l
तेरी दी हुई प्यार की चादर, प्यार से ओढ़ लेता हूँ ll
मेरे शहर के दोस्त जब भी मिलते हैं, गले मिलते हैं l
धड़कनो से एक दूसरे के दिल का हाल सुनते हैं ll
ना कोई मजहबी दीवार, ना बेकार का बंधन l
बस रेशमी धागों से जिंदगी के सपने बुनते हैं ll—————— ०३ अगस्त २०१९|

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इबादत में जरा आँखों को नम रखना
दुआ में यारों से ज्यादा दुश्मन रखना
उनके दिल में भी खुदा का घर है
दिलों को जीतने का ये भी फ़न रखना
चलो एक नया व्यापार किया जाए l
मोहोब्बत देने ओर लेने का इकरार किया जाए ll
ये वो सोदा है, जिसमें खसारा नहीं होता l
फिर क्यों न इसके लिए सभी को तैयार किया जाए ll —————— ०३ अगस्त २०१९|

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“रचना”

मेरा अपना ही देखो आज मुझसे रूठ गया है l
मेरा सपना ही देखो आज केसे टूट गया है ll
बांधी थी डोर प्यार की जिसके संग में l
उसका ही साथ देखो केसे छूट गया है ll
जरा रूक जाओ कोई सदा दे रहा है
जरा रख लो कि कोई वफ़ा दे रहा है
में अपने प्यार को लफ्जों में बयां केसे करूं
जरा देखो तो कोई दुआ दे रहा है

अपनी आँखों में मेने तुमको सजाया है, सुनो
याद करके तुम्हें में सुनो, रो नहीं सकता
डरता हूं, बह नहीं जाओ आसुओं के संग
इतनी आसानी से, में तुमको खो नहीं सकता

सोचता हूँ, दोस्तों से गम उधार ले लूँ
उनकी आंखों के आंसू हजार ले लूँ
वो खुश रहें बस, खुदा से दुआ करके
जरा जरा सा लेकर, बहुत सारा प्यार ले लूँ

नेकियाँ कभी जाया नहीं जाती
बदले में जिंदगी गुलशन हो जाती
ये दोलत वो है, जो बदले में सुकूं देती
बिना इसके जिंदगी वीरान हो जाती————०२ अगस्त २०१९ |

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