कवि अशोक गौतम

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जीवन परिचय: महशिवरात्रि के दिन १९६० में जन्मे कवि अशोक गौतम, भोपाल मध्यप्रदेश में खजांची बाग के रहने वाले हैं| गीत, गजल, भजन, लधुकथा, लोक गीत, कविताएँ आदि सभी विधाओं में रचनाएँ लिखने वाले अशोक गौतम जी की रचनाएँ देश के विभिन्न पत्र एवं पत्रिकाओं मे प्रकाशित हो चुकी हैं| राष्ट्रीय, प्रदेशीय, और स्थानीय स्तर पर लगभग ८० सम्मान प्राप्त कर चुके अशोक जी की रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी भोपाल तथा अन्य टीवी चैनलो पर हो चूका है|

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“मैं गुब्बारों मे साँसे बेच रहा हूँ” 

मैं गुब्बारों मे साँसे बेच रहा हूँ ,
कोई तो लेलों ?

बचपन के सब सपने टूटें ,
घर वाले सब सपने छूटे |

मात पिता और बहिन भाई के,
न जानू कब साथ है छूटे ||

बचपन से फुटपाट घर है |
घर की छत नीला अम्बर है ||

अपनी साँसे बेच रहा हूँ ,
रंग बिरंगे गुब्बारों मे |

अपने शहर के बाज़ारों मे ,
गलियो और चौबारों मे ||

पुल के नीचे सोता हूँ,
पुल के नीचे रहता हूँ |

जितने गुब्बारे बिक जाते है,
उतने पल जी लेता हूँ ||

जिससे गुब्बारे मे लाता हूँ |
उसके ही गुण गाता हूँ ||

जो लेता है मुझसे गुब्बारे ,
मैं उसको शीश नवाता हूँ |

जिसदिन न बिकते गुब्बारे,
मैं उसदिन भूखा सो जाता हूँ ||

साँसो का कोई मूल्य नहीं ,
दिनभर कांधे पर ले फिरता हूँ |

धूप तपन और भूख प्यास से ,
मैं गिरता पड़ता पलपल मरता हूँ ||

जिनके साथ है आते बच्चे,
वो ही रहम दिखाते है |

अपने बच्चो की खुशियो,
की खातिर वो गुब्बारे ले जाते है ||

उन बच्चो की खुशियों से ,
हम बच्चे कुछ खुशियाँ पाते है |

चंद सिक्को मे साँसे बेचकर ,
हम पेट की आग बुझाते है || ———— ०४ सितंबर २०१९

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