कवयित्री आरती पंवार

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जीवन परिचय: कवयित्री आरती पंवार उत्तरकाशी उत्तराखंड की रहने वाली हैं |

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एक बेटी कि आवाज़ – विधा कविता 

बेवजा हम को मिटा,ने की जरुरत क्या है,
हमको यूँ रुलाने की जरूरत क्या है l

हम न होते तो क्या होता,
ये देश ये दुनियां,ये जहाँ न होता,
हमको ही जहाँ से मिटा, ने की जरुरत क्या है l
बेवजा हम को……..जरुरत क्या है l

ये जहाँ जिस्म हम है रूह,
हम से ही देश का गुरुर,
जिस्म से रूह को मिटा,ने की जरुरत क्या है l
बेवजा हम को…………. जरुरत क्या है l

है हमी से वजूद तुम्हारा,
फिर क्यों हमें कोख में ही मारा,
खुदका ही वजूद मिटा,ने जरुरत क्या है l
बेवजा हम को……… जरुरत क्या है l

अश्क़ यूँ ही है बहते रहते,
कुछ न कहते चुप ही रहते,
अस्कों को बोलने की,इजाजत दे दो,
माँ आपने आंचल की हिफाज़त दे दो l
बेवजा हम को सताने की जरुरत क्या है l