ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

नीमच, मध्यप्रदेश |

समीक्षा

परिंदे (लघुकथा पर केंद्रित अंक )
पता- ए-79, दिलशाद गार्डन, पोस्ट ऑफिस के पास, दिल्ली -110095 
मूल्य -₹40 
पृष्ठ-116 
अतिथि सम्पादक- कृष्ण मनु
अनोखापन सभी को लुभाता है । साहित्य भी इससे अछूता नहीं है। समय के साथ इसमें भी बदलाव दृष्टिगोचर हो रहा है । पहले उपन्यास खूब पढ़े जाते थे। बाद में कहानियों का दौर आया। अब लघुकथा का बोलबाला है।
यह बोलबाला लघुकथा के सटीक कहन में निहित है। यह थोड़े शब्दों में बहुत-कुछ कह जाती है । चिंतन के चितवन में छोड़ देना इसकी दूसरी विशेषता है । इसी तीक्ष्ण कथ्य के लिए यह जानी-पहचानी जाती है। 
साहित्य के क्षेत्र में जो अलग हट कर काम करते हैं उनका बोल-बाला ज्यादा होता है । ऐसे ही ऐसा ही बोल-बाला परिंदे के लघुकथा पर केंद्रित अंक का हो रहा है। इसमें समाहित लघुकथाएं समय के अंतराल को बखूबी खंगालती हुई मह्सूस होती है । यह समय का अंतराल रचना में कितनी प्रौढ़ता लाता है इस अंक की लघुकथाओं में देखा जा सकता है।
लघुकथा पर केंद्रित इस अंक की अपनी अलग और अनोखी विशेषताएं है । इस में लघुकथाकार का संक्षिप्त परिचय लघुकथा के रचियता के संदर्भ में दिया गया है ।वहीं रचनाकार की प्रथम प्रकाशित लघुकथा के साथ उसका प्रकाशन समय, पत्रिका का नाम और वर्तमान अद्यतन लघुकथा को समावेशित करके इस की उपयोगिता में दुगनी वृद्धि की है।
इसके अतिथि सम्पादक कृष्ण मनु स्वयं लघुकथा के सशक्त हस्ताक्षर हैं । उन्होंने अपनी प्रतिभा का उपयोग करके लघुकथा पर केंद्रित उपयोगी आलेख, अपनी चिंता और लघुकथा के क्षेत्र में हो रहे बदलाव पर बहुत ही सटीक और संक्षिप्त ढंग से अपनी मनोव्यथा को व्यक्त किया है । 
अंक साफ-सुथरा व पठनीय है । मुखपृष्ठ चिताकर्षक है। पृष्ठ चिकने और अक्षर की आकृति सुंदर है । कुल मिलाकर पाठकों की दृष्टि से लघुकथा के क्षेत्र में अंक बहु उपयोगी है । इस के अनोखेपन की वजह से यह शोधार्थी के लिए भी उपयोगी है ।
सम्पादक साधुवाद का पात्र है ।अंक में सम्पादकीय सुझबुझ और श्रम साफ दृष्टिगोचर होता है।
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समीक्षक- ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’,
पोस्ट ऑफ़िस के पास, रतनगढ़,
जिला-नीमच-458226(मप्र) —————————— १५ जुलाई २०१९ |

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