एम. एस. अंसारी

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जीवन परिचय: एम. एस. अंसारी जी एक शिक्षक हैं और कोलकाता पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं|

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मुरझाते विश्वास ! टूटती आशाएँ  !!

मन में मलीनता का
वास हो रहा है ,
बाहर से मुंह का
उपवास हो रहा है |
नारे बड़े बड़े है ,
सियासत के खेल में ,
बेटियों का हर जगह,
अपमान हो रहा है |
रोजी घर से गायब ,
रोजगार भी है गायब ,
लाठी से बेरोजगारों का,
सम्मान हो रहा है |
ना कोर्ट ना कचहरी ,
ना कोई सुनवाई ,
बेटी का रात में अंतिम,
संस्कार हो रहा है |
बिकते हैं आज नेता,
बिकती है उनकी कुरसी ,
खुलेआम संविधान पर ,
प्रहार हो रहा है |
पार्टी तनाव में है ,
नेता तनाव में है ,
लगता है देश में कहीं ,
चुनाव आ रहा है |
भूखी है सारी जनता ,
मुंह में नहीं निवाला ,
आत्मनिर्भर बनने का,
फरमान आ रहा है |
सच जो कह दिया तो,
सच को दबा रहे हैं ,
सच भी
सच को छोड़कर ,
रसातल में जा रहा है |
चारों तरफ विकास ही,
विकास हो रहा है ,
फिर क्यों संसद तक ,
गाँव का किसान आ रहा है ?
निष्पक्षता का दम ,
भर रही है सियासत ,
फिर क्यों हर बात में ,
हिन्दू मुसलमान आ रहा है ?
वक़्त है बचा तो ,
कुछ कर के जाइए ,
अच्छे दिनों का चेहरा ,
अब सबको चिढ़ा रहा है |
जो सज़ा याफ्ता हैं ,
उन्हें तो मारो गोली ,
जो सच है वो कहाँ ,
भागे जा रहा है |
नेता कहाँ बचे हैं ,
जो सच को ला सकें ,
वो तो सांप बनके ,
जहर उगल रहें हैं |
बेटी नहीं सुरक्षित ,
लुट रही है इज़्ज़त ,
ऐसे ही देश में ,
रामराज्य ला रहे हैं |