आयुष राज

बिहार|

शिक्षा के साथ-साथ खेलो से बनती बच्चो की दूरी – (आलेख)

आज शिक्षा हर व्यक्ति का मुख्य आधार है। शिक्षा ग्रहन करना हमारा संविधानिक अधिकार है, परंतु इन सब के बीच, हमें शारीरिक व मानसिक तनाओ को खत्म करने हेतु खेलकूद और व्यायाम आदि पर भी ध्यान देना चाहिए। आज समाज मे जिस तरह से खेलो मे कमी आई है, वह आने वाली पीढ़ी के लिए अच्छी खबर नही है। शिक्षा के साथ-साथ अतिरिक्त पाठयक्रम जैसे संगीत, चित्रकला आदि मे भी बच्चो को रुचि बढ़ानी चाहिए। सरकारो और स्कुल प्रशासन को सजक्ता पूर्वक इन बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए। खेल मे रुचि बढ़ना आने वाली पीढ़ी के लिए काफी लाभदायक है। मेरी माने तो शिक्षा के साथ साथ खेल अति आवश्यक है, आजकल जिस तरह बच्चे सिर्फ आधुनिक उपकरणों, मोबाइल, टेबलेट, लैपटॉप इत्यादि मे ही लिप्त हो चुके है वह अच्छी चीज नही है। शिक्षा के साथ समाज मे खेलो को महत्व नहीं दिया जा रहा है। माता पिता चाहते है कि बच्चे सिर्फ पढ़ाई मे ही लिप्त रहें जबकि पढ़ाई के साथ साथ अन्य अतिरिक्त पाठयक्रम और खेल खेलने से हमे मानसिक तनाओ से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ भी ठीक रहता है, और खेलो के खेलने से रक्तचाप भी संतुलित रहता है तथा सोचने की मानसिकता मे बदलाओ आता है। फुटबॉल व टेनिस जैसे खेल खेलने से दिमाग ठंडा और संतुलित रहता है और हम गुस्से पर काबू भी पा सकते है। मेरी माने तो पढ़ाई के साथ बच्चो को अन्य कला के विभागों मे भी रुचि दिखानी चाहिए और रुचि रखने से चुस्त और दुरुस्त भी बने रहते है। उनकी सोचने की छमता दोगुनी हो जाती है और शरीरिक स्वास्थ भी बना रहता है। आज के माता पिता चाहते है की मेरा बच्चा सिर्फ पढ़ाई मे ही केंद्रित रहे और पढ़ाई का दबाव इतना बढ़ चुका है कि बच्चे अपना बचपन खो रहे है| माता-पिता का पढाई के लिए प्रेरित करना तो ठीक है परंतु अन्य विभागों मे न जाना ये चिंता का सबब है। एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना एक घंटा शरीरिक खेलकूद अति आवश्यक है यह न सिर्फ दिमाग को ठंडक देता है शरीरिक रोग को भी भगाता है। मेरा सभी माता पिता से आग्रह है कि बच्चो को जरूर शरीरिक खेलकूद वाले खेल खिलाएं और और खेलकूद के लाभ बताएं क्योकि कभी-कभी जो पाठ शिक्षा नहीं दे पाती वह वो आतिरिक्त पाठ्यक्रम करा देती है| इसी कारण आज भी गाँव मे बच्चे शहरो के बच्चो के मुकाबले स्वस्थ और शरीरिक ढंग से भी मजबूत रहते है।
पहली जिम्मेदारी माता-पिता की है कि बच्चो की बाते सुने उन्हें प्रोत्साहित करें, उन पर किसी प्रकार का दबाव न बनाएँ और खेलों के प्रति उन्हें जागरूक करें तथा खेलों के महत्व को भी समझाएं |
दूसरी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है कि वह स्कूल मे हर साल स्पोर्ट मीट का आयोजन करे व एक पीरियड प्रतिदिन खेलकूद का रखे और बच्चो की भागीदारी को सुनिश्चित करे और जो बच्चे पढाई के आलावा खेलों में रूचि रखते हैं उन्हें खेल कूद की सुविधाएँ उपलब्ध कराएँ और बच्चो को जागरुक करे। मेरे माता पिता ने मुझे शिक्षा के साथ साथ जीवन मे खेलों के प्रति रुचि कराई और समझाया कि खेलकूद हमारे जीवन का अभिन्य अंग है जो हमारे आगे की सोचने की क्षमता को बढ़ाते हैं और हमे समृद्ध जीवन प्रदान करते हैं| सभी उक्त बातें मेरे माता पिता ने मुझे समझायी, जिससे मुझे प्रेरणा मिली और सही जीवन पथ पर मैं चला| सभी को इसे अपने जीवन में अपनाना चाहिए और पढ़ाई के आतिरिक्त अन्य किसी भी विभाग मे रुचि रखना चाहिए, ताकि आने वाला भारत स्वस्थ और संतुलित भारत हो।
“आयुष राज एक युवा लेखक हैं| पढाई के आलावा खेलों में रूचि रखते हैं उन्हें खेल कूद की सुविधाएँ उपलब्ध कराएँ और बच्चो को जागरुक करे। मेरे माता पिता ने मुझे शिक्षा के साथ साथ जीवन मे खेलों के प्रति रुचि कराई और समझाया कि खेलकूद हमारे जीवन का अभिन्य अंग है जो हमारे आगे की सोचने की क्षमता को बढ़ाते हैं और हमे समृद्ध जीवन प्रदान करते हैं| सभी उक्त बातें मेरे माता पिता ने मुझे समझायी, जिससे मुझे प्रेरणा मिली और सही जीवन पथ पर मैं चला| सभी को इसे अपने जीवन में अपनाना चाहिए और पढ़ाई के आतिरिक्त अन्य किसी भी विभाग मे रुचि रखना चाहिए, ताकि आने वाला भारत स्वस्थ और संतुलित भारत हो।
“आयुष राज एक युवा लेखक हैं| कृपया प्रतिक्रिया भेज कर इस युवा लेखक का मनोबल बढ़ाएँ|” —–२९ जुलाई २०१९ |

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